Sugar Price : देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम ग्रहणी, हलवाइयों को चिंता में डाला ही है अब इस पर राजनीतिक दलों ने भी केन्द्र से सवाल पूछने शुरु कर दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है। खरगे ने एक्स पर पोस्ट किया है कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कडवाहट चीनी की मिठास में घुल गई है।
खरगे ने किए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत पर भी सवाल उठाया। खड़गे ने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है।
देश में चीनी के दाम बढें
देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40 प्रतिशत यानी 19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है। बता दें कि चीनी के अलावा गुड़, चावल और मक्के का आटा तक महंगा हुआ है। शुगर के दाम बढ़ने की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास 47 लाख टन शुगर थी, जो इस बार घटकर 32 लाख टन रह गई है। एथेनॉल बनाने में भी गन्ने और उससे बने उत्पादों का इस्तेमाल हुआ है।
चीनी की कमी नहीं होने का दावा
इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश में चीनी की कमी नहीं है। संगठन के मुताबिक, कीमतों में तेजी की वजह सट्टेबाजी और लोग ज्यादा शुगर खरीदकर रखने की कोशिश भी हो सकती है। वहीं, कारोबारियों का कहना है कि एथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल से शुगर की उपलब्धता पर असर पड़ा है।
सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़ी चीनी की कीमत
सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल बनाने में गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक है। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे मिलों की ओर से दाम बढ़ाना, जमाखोरी और सट्टेबाजी प्रमुख वजह हैं। सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है।
खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही
खाद्य सचिव चोपड़ा के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12ः थी। यह 2025-26 में घटकर करीब 9ः रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए सिर्फ 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है।
अक्टूबर तक पर्याप्त स्टॉक का दावा
इस सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 स्डज् था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण उत्पादन घटा है। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर
चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ा है। 2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 स्डज् रहने का अनुमान है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में 16% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। वहीं, थोक उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू होगी। कृत्रिम कमी रोकने के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं।
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