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आरक्षण विरोधी आंदोलन के बीच कांग्रेस ने छेड़ा जातिगत जनगणना का मुद्दा, कहा- मोदी सरकार चुप्पी…

Jairam Ramesh

Caste Census: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आज मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बिहार के जाति सर्वेक्षण के नतीजे 2 अक्टूबर 2023 को प्रकाशित किए गए थे और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के नतीजे 4 फरवरी 2025 को प्रकाशित किए गए थे.इस पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री से यह मांग है कि वे आने वाली राष्ट्रीय स्तर की जनगणना के लिए उसी तरीके को अपनाएं जिसका इस्तेमाल बिहार और तेलंगाना में किया गया था, जिसकी शुरुआत अभी-अभी हुई है. प्रधानमंत्री के पास सुधार करने का अभी भी समय है, क्योंकि जाति जनगणना अभी केवल लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में शुरू हुई है, देशव्यापी प्रक्रिया फरवरी 2027 के लिए तय है.

“लेकिन मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए है”
जयराम रमेश ने आगे कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री मौजूदा योजना को रद्द कर दें और इसके बजाय राष्ट्रीय स्तर पर उसी तरीके को लागू करें जिसका इस्तेमाल बिहार और तेलंगाना में किया गया था. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने एक रचनात्मक सुझाव दिया है, और हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इस पत्र को नजरअंदाज नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 2023 और 2024 में लोकसभा चुनाव के समय जातिगत जनगणना की मांग की थी, तो नरेंद्र मोदी ने कहा- जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस की मांग ‘अर्बन नक्सल’ सोच है. लेकिन 30 अप्रैल 2025 को मोदी सरकार ने घोषणा कर दी कि 2027 में जातिगत जनगणना होगी. इसके कुछ दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना को लेकर कुछ सुझाव दिए थे. तभी से कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की जाए. राज्य सरकारों से चर्चा कर सुझाव लिए जाएं. सामाजिक न्याय को ध्यान में रखकर जातिगत जनगणना कराने पर विचार करें. लेकिन मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए है और किसी से भी चर्चा नहीं की गई.

“पहले से ही जातियों की एक सूची तैयार करनी होगी”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और सरकार ईमानदारी से जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहती है, क्योंकि जिस तरीके से इसे कराया जा रहा है, वह धोखा है. मोदी सरकार जानबूझकर जातिगत जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रही है. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और मांगें रखी हैं कि जैसे जातिगत जनगणना कराई जा रही है, उसे रद्द किया जाए. बिहार और तेलंगाना में जो तरीका अपनाया गया था, उसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए. अगर मोदी सरकार सामाजिक न्याय में विश्वास में रखती है तो वह ईमानदारी से देश में जातिगत जनगणना कराए. 21 सितंबर 2021 को मोदी सरकार में शिक्षा मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एफिडेबिट दिया गया कि अगर जातिगत जनगणना कराना है, तो पहले से ही जातियों की एक सूची तैयार करनी होगी.

“जनगणना की घोषणा के बाद से वे लगातार यू-टर्न मार रहे हैं”
कांग्रेस सांसद ने कहा कि अब पता नहीं कि ये जानकारी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को है या नहीं. लेकिन बिहार में जातिगत सर्वेक्षण के लिए 215 जातियों की सूची बनाई गई थी और ऐसा ही तेलंगाना के जातिगत सर्वेक्षण में हुआ. हमारे देश में करीब 4,200 जातियां हैं, हर राज्य के पास जातियों की सूची होती है, उसी के आधार पर आरक्षण दिया जाता है. केंद्र सरकार के पास भी अपनी सूची होती है. अगर सरकार की नीयत साफ है तो प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता विपक्ष राहुल गांधी के पत्र को संज्ञान में लेंगे. जातिगत सर्वेक्षण के लिए जो सिस्टम बिहार व तेलंगाना में अपनाया गया, उसी को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करेंगे. कांग्रेस पार्टी मानती है कि जिस तरह देश में जातिगत जनगणना कराई जा रही है, वह जनता के साथ धोखा है. मोदी सरकार जनता को धोखा देने के बजाए सही तरीके से देश में जातिगत जनगणना कराए. उन्होंने कहा कि पहले तो प्रधानमंत्री मोदी कई वर्षों तक जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते थे, लेकिन जनगणना की घोषणा के बाद से वे लगातार यू-टर्न मार रहे हैं. जिस तरह से ये जनगणना कराई जा रही है, उसे हम स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि यह सिर्फ एक White wash है. हमारी पार्टी के नेताओं ने कई पत्र लिखे हैं, जिनका जवाब अब तक नहीं आया है, लेकिन हम इस मुद्दे को नहीं छोड़ेंगे. हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी हमारे पत्र और उनके सुझावों को गंभीरता से लेंगे.

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