महाराष्ट्र में चुनावी माहौल बनने से पहले ही राज्य की राजनीति में अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ सत्ता साझेदारों के बीच दूरी कम होती दिख रही है, तो दूसरी तरफ परिवारिक और राजनीतिक रिश्तों में नई गर्माहट दिखाई दे रही है।
बीजेपी और शिंदे गुट फिर नजदीक
हाल ही में नागपुर में एक बंद कमरे में हुई बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लगभग एक घंटे तक रणनीति पर चर्चा की। इसी बैठक में 29 महानगरपालिकाओं में साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमति बनी।
इसके बाद गठबंधन को अंतिम रूप देने के लिए आज रात एक और अहम बैठक होने वाली है, जिसमें आगामी मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई नगर निगम चुनावों पर निर्णय होना है।
नवी मुंबई—सबसे बड़ा फॉर्मूला
नवी मुंबई दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जहां एकनाथ शिंदे इसे अपना राजनीतिक प्रभाव वाला इलाका मानते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ वरिष्ठ नेताओं का वहां मजबूत पकड़ है। ऐसे में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय करना एक चुनौती है, लेकिन दोनों पक्ष गठबंधन के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।
उच्च स्तर पर हस्तक्षेप से पटरी पर लौटा रिश्ता
गृह मंत्री स्तर पर हुई बातचीत के बाद दोनों गुटों के बीच बने तनाव में नरमी आई है। माना जा रहा है कि इसी हस्तक्षेप के बाद गठबंधन को लेकर सकारात्मक माहौल फिर से तैयार हुआ है।
चाचा-भतीजा की राजनीति में नई समीकरण
राज्य की दूसरी बड़ी हलचल शरद पवार और अजित पवार के बीच बढ़ती निकटता है।
अजित पवार ने हाल ही में दिल्ली में अपने चाचा से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी।
बैनरों से बढ़ी चर्चा
पुणे में लगे बड़े-बड़े बैनर इस नई केमिस्ट्री की ओर इशारा कर रहे हैं। बैनरों में दोनों नेताओं की तस्वीरें और प्रतीक चिन्ह लगे हैं, जिससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या दोनों फिर एक मंच पर आ सकते हैं?
पारिवारिक समीकरण भी आए सामने
अजित पवार हाल ही में बहरीन में आयोजित पारिवारिक समारोह में भी शामिल हुए, जिससे रिश्तों में गर्माहट की अटकलें और मजबूत हो गईं।
इन सभी घटनाओं ने राज्य की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
क्या बदलने वाला है महाराष्ट्र का चुनावी गणित?
राज्य में इस समय दो प्रमुख मोर्चों पर गहरी हलचल है—
एक ओर सत्ता पक्ष के सहयोगियों के बीच संबंध मजबूत होते दिख रहे हैं।
दूसरी ओर परिवार और राजनीति दोनों स्तर पर एक नए दौर की शुरुआत होती दिखाई दे रही है।
इन अप्रत्याशित घटनाओं ने आगामी चुनावों को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या गठबंधन फिर नए रूप में सामने आएंगे?
क्या राजनीतिक रिश्तों की नए सिरे से परिभाषा लिखी जा रही है?
महाराष्ट्र की राजनीति इस समय सबसे दिलचस्प स्थिति में है।



