Students learn film making : जयपुर में सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण और डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष ‘फिल्म-इन-एजुकेशन’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। सोमरंजन फाउंडेशन, उदयपुर की ओर से बुबुगाओ कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड के सीएसआर सहयोग से आयोजित कार्यशाला में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का आयोजन राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय पानों का दरीबा और सुभाष चौक स्थित राजकीय विद्यालय में किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को मोबाइल फिल्ममेकिंग के माध्यम से फिल्म निर्माण और डिजिटल कंटेंट तैयार करने की बारीकियों से परिचित कराया गया।
विद्यार्थियों ने सीखा कहानी को पर्दे तक पहुंचाने का तरीका
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने फिल्म निर्माण की शुरुआती अवधारणाओं से लेकर वीडियो तैयार करने तक की प्रक्रिया को समझा। मोबाइल से शूटिंग करने, दृश्य की योजना बनाने, अभिनय करने और कहानी को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला का संचालन सोमरंजन फाउंडेशन की ट्रेनर्स सुनाक्षी और दिव्यांश गोयल ने किया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ गतिविधियों में हिस्सा लिया और मोबाइल के माध्यम से रचनात्मक कंटेंट तैयार करने का अनुभव प्राप्त किया।
मोबाइल बना रचनात्मकता का माध्यम
कार्यशाला में विद्यार्थियों को स्टोरीटेलिंग, कंटेंट क्रिएशन, कैमरा संचालन, वीडियो मेकिंग और एक्टिंग सहित विभिन्न डिजिटल एवं रचनात्मक कौशलों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विद्यार्थियों ने मोबाइल फोन के माध्यम से कहानी को दृश्य रूप देने, कैमरे के अलग-अलग एंगल समझने और वीडियो तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से जाना। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि प्रभावी कहानी कहने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि विषय की समझ, रचनात्मक सोच और प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण होती है। विद्यार्थियों ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को समझने के साथ ही इन तकनीकों को स्वयं आजमाकर व्यावहारिक अनुभव हासिल किया।
डिजिटल युग में नए अवसरों से परिचित कराना उद्देश्य
सोमरंजन फाउंडेशन की डायरेक्टर डॉ. बेला मलिक के मुताबिक कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को फिल्ममेकिंग, कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल स्किल्स में दक्ष बनाना है। उन्होंने कहा- डिजिटल माध्यमों के तेजी से विस्तार के साथ इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए करियर के नए अवसर सामने आ रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही इन कौशलों से परिचित कराना उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में मददगार हो सकता है। बेला मलिक के अनुसार मोबाइल फोन आज केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावी माध्यम भी बन चुका है। इसके सही इस्तेमाल के जरिए विद्यार्थी अपनी कहानियों और विचारों को व्यापक मंच तक पहुंचा सकते हैं। आयोजक ऋषभ जैन ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी मोबाइल फिल्ममेकिंग और डिजिटल स्किल्स जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में विद्यार्थियों के लिए पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी और रचनात्मक कौशल का विकास भी महत्वपूर्ण है। इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को तकनीक के रचनात्मक इस्तेमाल की दिशा दिखाने के साथ उनके आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी मजबूत कर सकती हैं।
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