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इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस वर्मा पर लगे आरोप साबित, जांच समिति बोली- सबूतों से छेड़छाड़ हुई

Investigation Report on justice verma

Investigation Report : इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के घर के स्टोर रुप में मिले नोटों की बोरी की जंाच पूरी हो गई है जिसमें न्यायाधीश वर्मा पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। संसद की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के ऊपर लगे तीनों आरोपों को सही पाया है। समिति की रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों की नकदी काफी मात्रा मिली थी। लेकिन जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत, मालिकाना हक या वहां मौजूद होने की संतोषजनक वजह नहीं बता सके। जस्टिस वर्मा इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

घर में बड़ी मात्रा में बेहिसाब कैश मिला

जांच समिति ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में 500 रुपये के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। फायर सर्विस और पुलिस के कर्मचारियों ने जांच के दौरान बताया कि नोट सिर्फ एक जगह नहीं थे, बल्कि स्टोर रूम के बड़े हिस्से में फैले हुए थे। दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने बताया कि उसने 500 रुपये के नोटों के बंडल देखे थे, जो स्टोर रूम में 7-8 फीट तक फैले हुए थे। पुलिस अधिकारी रूपचंद से जब पूछा गया कि क्या नकदी की मात्रा 5 लाख से ज्यादा थी, तो उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा बहुत छोटा है।
हालांकि, नोटों को जब्त नहीं किया गया, उनकी गिनती नहीं हुई और न ही नोटों के नमूने सुरक्षित किए गए। इसी वजह से समिति यह निर्धारित नहीं कर सकी कि वहां वास्तव में कितनी नकदी थी।

आग के बाद सबूतों से छेड़छाड़ हुई

जांच समिति की जांच में पाया कि आग बुझने के बाद स्टोर रूम को तुरंत सील नहीं किया गया। सुरक्षा अधिकारी ने जस्टिस वर्मा के स्टाफ को वहां रात करीब 3 बजे सफाई करते देखा। सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरा साफ कर दिया गया। वहां मिले नोट भी सुरक्षित नहीं किए गए और बाद में मिले भी नहीं। कमेटी ने माना कि इस तरह महत्वपूर्ण सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए और उनसे छेड़छाड़ हुई।

जस्टिस वर्मा के जवाब टालमटोल वाले और भ्रामक थे

शुरुआत में जस्टिस वर्मा ने कहा कि उन्हें कैश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बाद में बचाव में नकदी नकली होने, साजिश के तहत रखे जाने के बात कही। लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई शिकायत या ठोस सबूत सामने नहीं आया। जस्टिस वर्मा ने खुद भी गवाही नहीं दी और अपने परिवार या स्टाफ को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया। समिति ने जस्टिस वर्मा की सफाई को अधूरी, टालमटोल वाली और प्रभाव में भ्रामक माना।

9 अप्रैल को जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया

9 अप्रैल 2026 को जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लिखा था कि, मैं आपके सम्मानित कार्यालय को उन कारणों से परेशान नहीं करना चाहता, जिनकी वजह से मुझे यह पत्र लिखना पड़ रहा है। लेकिन गहरे दुख के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।

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