Elephants : विश्व हाथी दिवस पर वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन संस्था ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर आमेर किले में संचालित हाथी सवारी बंद करने की मांग की है। संस्था का कहना है कि हाथियों को पर्यटकों की सवारी के लिए इस्तेमाल करने की बजाय उनके लिए प्राकृतिक अभयारण्य जैसा वातावरण विकसित किया जाना चाहिए, जहां लोग उन्हें उनके स्वाभाविक व्यवहार के साथ सुरक्षित दूरी से देख सकें। संस्था ने महावतों को विशेष प्रशिक्षण देकर अभ्यारण गाइड बनाने और हाथियों की देखभाल से जुडे कामों में लगाने का प्रस्ताव दिया है।
हाथियों के संरक्षण के लिए लगाए नारे
इस मांग के समर्थन में संस्था के प्रतिनिधियों ने छोटे बच्चों के साथ हाथियों के संरक्षण के लिए नारे भी लगाए। यह कार्यक्रम जवाहर सर्किल पर आयोजित किया गया। संस्था ने बताया कि हर साल 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस हाथियों के संरक्षण और उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
कठोर ट्रेनिंग पर उठाए सवाल
संस्था ने हाथियों को प्रशिक्षित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि जंगली हाथियों को इंसानी आदेशों का पालन कराने के लिए कई जगह कभी-कभी कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। संस्था ने इसे ‘द क्रश’ नाम की प्रक्रिया से जोड़ा है। इससे हाथियों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। संस्था का आरोप है कि आमेर में कुछ वृद्ध और बीमार हाथियों से भी काम करवाया जाता है।
सुरक्षा पर जताई चिंता
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन इंडिया के वाइल्डलाइफ कैम्पेन मैनेजर शुभोब्रतो घोष ने कहा कि यह केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि पर्यटकों, महावतों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा का भी विषय है। हाथी बेहद बुद्धिमान, सामाजिक और संवेदनशील वन्यजीव हैं। लंबे समय तक तनाव और शारीरिक या मानसिक परेशानी झेलने के चलते उनका व्यवहार अप्रत्याशित हो जाता है। पिछले कुछ वर्षों में आमेर किले में तनावग्रस्त हाथियों के आक्रामक होने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पर्यटकों, महावतों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
चंचल हाथी का जिक्र
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन ने अपने बयान में चंचल नाम की हथिनी का भी जिक्र किया है। संस्था के अनुसार 2025 में एक फोटोशूट के दौरान रूसी कलाकार जूलिया बुरुलेवा ने चंचल को गुलाबी रंग से रंगा था। इसी साल उस हथिनी की मौत हो गई। संस्था ने बंदी हाथियों के कल्याण और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए।
क्रूरता-मुक्त पर्यटन मॉडल का सुझाव
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन का कहना है कि हमारा उद्देश्य केवल आमेर में हाथी की सवारी बंद करवाना नहीं है, बल्कि इसके स्थान पर एक स्थायी और क्रूरता-मुक्त पर्यटन मॉडल विकसित करना भी है। संस्था ने ऐसे मॉडल का प्रस्ताव रखा है जिसमें पर्यटकों को प्राकृतिक अभ्यारण्य जैसे वातावरण में हाथियों को देखने का अवसर मिले। इस मॉडल के तहत पर्यटक सुरक्षित दूरी से हाथियों को चलते, नहाते, भोजन तलाशते और दूसरे हाथियों के साथ सामाजिक व्यवहार करते हुए देख सकेंगे। संस्था के मुताबिक इससे पर्यटकों को हाथियों के प्राकृतिक व्यवहार और संरक्षण के बारे में जानकारी भी मिलेगी और वन्यजीव पर्यटन को अधिक जिम्मेदार बनाया जा सकेगा।
महावतों की आजीविका योजना
संस्था ने प्रस्ताव दिया कि वर्तमान महावतों को विशेष ट्रेनिंग देकर अभ्यारण्य गाइड, शैक्षिक प्रशिक्षक और हाथियों की देखभाल से जुड़े कार्यों में लगाया जा सकता है।
दुनिया भर में पर्यटक अब जिम्मेदार और नैतिक वन्यजीव पर्यटन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके लिए अधिक शुल्क देने को भी तैयार हैं। संस्था का मानना है कि इस तरह का बदलाव स्थानीय समुदायों के लिए लंबे समय तक आय का स्थायी स्रोत बन सकता है और जयपुर को जिम्मेदार एवं टिकाऊ विरासत पर्यटन के वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।
‘राजस्थान निर्णायक कदम उठाए’
वर्ल्ड एनिमल प्रोटेक्शन के कंट्री डायरेक्टर गजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि विश्व हाथी दिवस के मौके पर दुनिया की नजरें राजस्थान पर हैं। उन्होंने राजस्थान सरकार से आमेर किले में हाथी की सवारी को समाप्त कर हाथियों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आमेर की हाथी सवारी समाप्त करना वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा और हाथियों के लिए अधिक मानवीय भविष्य सुनिश्चित करेगा।
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