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राजस्थान के जनप्रतिनिधियों पर 41 आपराधिक मामले लंबित, हाईकोर्ट कर रहा लगातार मॉनिटरिंग

Criminal cases on public figuars
Criminal cases : लोकतंत्र में जनहित के मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों का विरोध होना या राजनीतिक कारणों से मुकदमे दर्ज होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आपराधिक मामले वर्षों तक अदालतों में लंबित रहें तो यह न्याय व्यवस्था और राजनीतिक शुचिता, दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। राजस्थान में भी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या इसी बहस को फिर से केंद्र में ला रही है।

हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट मौजूदा और पूर्व सांसदों एवं विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। हाईकोर्ट समय-समय पर ट्रायल कोर्ट और जिला अदालतों से स्टेटस रिपोर्ट मंगवाकर मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश भी जारी करता रहा है।

30 जून तक जारी स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ 41 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें कई मामले वर्षों से विचाराधीन हैं, जबकि कुछ मामलों में सुनवाई गवाहों की अनुपस्थिति या अन्य कानूनी कारणों से आगे नहीं बढ़ पा रही है।

किन-किन जनप्रतिनिधियों पर लंबित हैं मामले

राज्य की विभिन्न अदालतों में केंद्रीय मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, पांच मंत्रियों, 13 वर्तमान विधायकों और 13 पूर्व विधायकों के खिलाफ मामले विचाराधीन हैं। इनमें भाजपा के 6 विधायक, कांग्रेस के 5 विधायक, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का एक विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।

इन मंत्रियों के खिलाफ अदालतों में मामले लंबित

राजस्थान की विभिन्न अदालतों में निम्न प्रमुख जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक मामले विचाराधीन हैं—

केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत – जोधपुर कोर्ट
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा – थानागाजी कोर्ट
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम – गोपालगढ़ दंगा प्रकरण, जयपुर कोर्ट
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा – सीकर कोर्ट
जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी – मालपुरा (टोंक) कोर्ट
ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर – कोटा कोर्ट

निर्दलीय और BAP विधायक भी सूची में

निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी के खिलाफ जोधपुर में दो मामले विचाराधीन हैं।
भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक उमेश डामोर के खिलाफ डूंगरपुर कोर्ट में मामला लंबित है।

भाजपा के इन विधायकों पर भी लंबित हैं मुकदमे

भाजपा के जिन विधायकों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में मामले लंबित हैं, उनमें शामिल हैं—

जितेंद्र गोठवाल – एडीजे कोर्ट, लालसोट (दो मामले)
जयदीप बिहाणी – एडीजे कोर्ट, श्रीगंगानगर
गोपाल शर्मा – एसीजेएम कोर्ट, जयपुर
कालीचरण सराफ – जयपुर कोर्ट (सांप्रदायिक दंगा प्रकरण)
शांता देवी – सराड़ा कोर्ट
राजेंद्र गुर्जर – सीजेएम कोर्ट, मालपुरा

कांग्रेस के इन विधायकों के खिलाफ भी चल रही सुनवाई

कांग्रेस के जिन विधायकों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में मामले लंबित हैं, उनमें शामिल हैं—

शांति धारीवाल – एसीडी कोर्ट, जयपुर
कांति प्रसाद मीणा – एसीजेएम कोर्ट, थानागाजी
अशोक चांदना – एसीडी कोर्ट, श्रीगंगानगर
ललित यादव – जयपुर कोर्ट
रामनिवास गावड़िया – जयपुर कोर्ट (दो मामले)

10 साल से अधिक पुराने भी हैं कई मामले

राजस्थान में जनप्रतिनिधियों से जुड़े सबसे अधिक लंबित मामले जयपुर, बांसवाड़ा, जोधपुर और श्रीगंगानगर की अदालतों में दर्ज हैं। इनमें कुछ मुकदमे ऐसे भी हैं जो **दस वर्ष या उससे अधिक समय** से विचाराधीन हैं। कई मामलों में गवाहों की अनुपस्थिति, लंबी न्यायिक प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अन्य कानूनी कारणों से सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है।

हाईकोर्ट की प्राथमिकता: जल्द हो मामलों का निस्तारण

राजस्थान हाईकोर्ट लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों का शीघ्र निस्तारण हो ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत बना रहे। किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अदालत में मामला लंबित होना दोषसिद्धि (Conviction) नहीं माना जाता। जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया जाता, तब तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।

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