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संवाद अदायगी के बेताज बादशाह ‘राजकुमार’, जिनके डायलॉग ही होते थे फिल्म की जान

Film Actor Rajkumar

Film Actor RajKumar : फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कम ऐसे अभिनेता हैं जिनके किस्से लोगों को याद रहते हैं खास तौर से उनके निजी जीवन और फिल्म के डायलॉग को लेकर। ऐसे ही एक अभिनेता रहे हैं राजकुमार। अपनी हाजिर जवाबी, अकड, दूसरों से सर्वश्रेष्ठ समझना और हर फिल्म में एक ऐसा डायालॉग बोलना जो फिल्म की जान बन जाए। राजकुमार पहले ऐसे अभिनेता रहे जो फ्लॉप फिल्म के बाद भी अपनी फीस बढ़ा देते थे। कहते थे- ‘मेरी पिक्चर चले न चले, मैं फेल नहीं हुआ। कभी बप्पी लाहिड़ी के गहने पहनने का सरेआम मजाक बना देते थे, तो कभी गोविंदा जैसे कलाकारों की शर्ट काटकर रूमाल बना लेते थे।

बेबाकी अभिनेता

जन्म- 8 अक्तूबर 1926 बलूचिस्तान (अब पाकिस्तान में), मृत्यु- 3 जुलाई 1996 मुम्बई) हिन्दी फ़िल्मों में एक भारतीय अभिनेता थे। इनका नाम कुलभूषण पंडित था लेकिन फ़िल्मी दुनिया में ये अपने दूसरे नाम ‘राज कुमार’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। पारम्परिक पारसी थियेटर की संवाद अदाइगी को इन्होंने अपनाया और यही उनकी विशेष पहचान बनी। इनके द्वारा अभिनीत प्रसिद्ध फ़िल्मों में पैग़ाम, वक़्त, नीलकमल, पाकीज़ा, मर्यादा, हीर रांझा, सौदाग़र आदि हैं।

इनके सामने बोलने से कतराते थे

बेबाकी और हाजिर जवाबी ऐसी थी कि बड़े-बड़े कलाकार भी इनके सामने बोलने से कतराते थे। और हुनर और खौफ ऐसा कि रजनीकांत जैसे सुपरस्टार भी एक दौर में इनके साथ फिल्म करने से झिझकते थे। गले के कैंसर के चलते 1996 में उनका निधन हो गया। राजकुमार का मानना था कि मौत एक निजी मामला है, यही वजह है कि उन्होंने बीमारी और मौत राज रखने की आखिरी इच्छा जाहिर की। आज राजकुमार को गुजरे 30 साल हो चुके हैं। लेकिन उनकी बेबाकी, रौबदार पर्सनैलिटी के वो किस्से जो उनके व्यक्तित्व को समझने में मदद करते हैं-

पार्टी में अमिताभ बच्चन के सूट की कर दी पर्दे से तुलना

60 के दशक में राजकुमार करियर के शिखर पर थे। जितनी उनके अभिनय की तारीफ होती थी, उससे कहीं ज्यादा चर्चा उनके बड़बोलेपन की होती थी। हर कोई उनके सामने ज्यादा बाद करने से कतराते थे। एक समय ऐसा था, जब अमिताभ बच्चन फिल्मों में नए-नए आए थे। दोनों की मुलाकात एक पार्टी में हुई। अमिताभ ने पार्टी में विदेशी थ्री पीस सूट पहना था। राजकुमार पास आए और पूछा, सूट कहां से सिलवाया। अमिताभ को लगा वो तारीफ कर रहे हैं, तो उन्होंने झट से पता बताना चाहा, लेकिन आगे राजकुमार ने सूट को ऊपर से नीचे देखते हुए कहा- मुझे भी पर्दे सिलवाने हैं। अमिताभ बच्चन इस बेइज्जती पर कुछ कह नहीं सके और मुस्कुराकर वहां से निकल गए।

कॉमेडियन को ज्यादा डायलॉग मिले तो भड़क गए

1971 में रिलीज हुई फिल्म मर्यादा में राजकुमार को एक दयालु व्यक्ति की भूमिका मिली। फिल्म में दिखाया जाना था कि उन्होंने नौकर की मां के इलाज के लिए पैसे दिए और मां ठीक हो गईं। नौकर का किरदार कॉमेडियन मोहन चोटी को दिया गया था। सीन के मुताबिक मोहन चोटी को कहना था, मालिक आपने मुझे मां के इलाज के लिए पैसे दिए थे, मां बिल्कुल ठीक हो गई है। मैं आपका ये एहसान कैसे उतारूंगा। मालिक क्या मैं आपके नहाने के लिए पानी गर्म कर दूं। सेट पर रिहर्सल शुरू हुई। मोहन चोटी ने जैसे ही ये डायलॉग कहा, राजकुमार भड़क गए और कहा- अब हमारे ऐसे दिन आ गए कि ये मोहन चोटी बोलेगा और हम सुनेंगे।

डायलॉग बदल कर यूं बोले राजकुमार

कुछ देर बाद जैसे ही एक्शन बोला गया, मोहन चोटी के डायलॉग बोलने से पहले ही राजकुमार ने खुद पूरे डायलॉग बदल दिए और कहा, मोहन इधर आओ, हमने तुम्हारी मां के इलाज के लिए रुपया दिया था, सुना है तुम्हारी मां बिल्कुल ठीक हो गई। अरे भाई, एहसान मानने की बात नहीं है, ये हमारा फर्ज था। अब खड़े-खड़े मुंह क्या देख रहे हो, जाओ मेरे नहाने के लिए पानी गर्म करो।

राजकुमार के कुछ चर्चित डायलॉग –

– ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं हाथ कट जाए तो खून निकाल आता है। फ़िल्म वक़्त (1965)
– चिनॉय सेठ, जिनके अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। फ़िल्म वक़्त (1965)

– जो भारी न हो.. वो दुश्मनी ही क्या। फ़िल्म तिरंगा (1992)
– हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है। दुश्मन से सीधी बात करती है। फ़िल्म ‘तिरंगा’ (1992)
– राजस्थान में हमारी भी ज़मीनात हैं. और तुम्हारी हैसियत के जमींदार, हर सुबह हमें सलाम करने, हमारी हवेली पर आते रहते हैं- सूर्या (1989)

गोविंदा की तोहफे में दी हुई शर्ट काटकर बना लिया रूमाल

गोविंदा ने करियर की शुरुआत में राजकुमार के साथ 1989 की फिल्म जंगबाज में काम किया था। एक दिन सेट पर राजकुमार ने गोविंदा को देखकर कहा- तुम्हारी शर्ट बहुत शानदार है। गोविंदा, राजकुमार जैसे बड़े स्टार से तारीफ मिलने से बेहद खुश हो गए। उन्होंने झट से कहा- सर, आपको ये शर्ट पसंद आ रही है, तो आप इसे रख लीजिए। गोविंदा ने तुरंत शर्ट उतारकर राजकुमार को दे दी। गोविंदा जैसे नए एक्टर के लिए ये बड़ी बात थी कि उन्होंने राजकुमार को तोहफे में शर्ट दी और राजकुमार उनकी दी हुई शर्ट कभी पहनेंगे। दो दिन बाद गोविंदा का दिल तब टूटा, जब राजकुमार ने उनकी दी हुई शर्ट काटकर रूमाल बना लिया था। ये किस्सा डायरेक्टर मेहुल कुमार ने एक इंटरव्यू में सुनाया।

बप्पी लाहिड़ी के गहने देख कहा- मंगलसूत्र भी पहन लेते

लीजेंड्री सिंगर बप्पी लाहिड़ी सोने के भारी गहने पहनने के लिए भी मशहूर थे। एक दिन एक पार्टी में राजकुमार की बप्पी दा पर नजर पड़ गई। जब बप्पी उनसे मिलने करीब गए, तो राजकुमार ने ऊपर से नीचे देखकर कहा- वाह, शानदार! एक से एक गहने पहने हो, सिर्फ मंगलसूत्र की कमी रह गई है, वो भी पहन लेते।

सलमान पहचान नहीं सके तो कहा- अपने अब्बा से पूछो हम कौन हैं

1989 में सलमान खान की फिल्म मैंने प्यार किया सुपरहिट रही। प्रोड्यूसर सूरज बड़जात्या ने एक पार्टी रखी, जिसमें राजकुमार भी पहुंचे। बड़जात्या के लिए ये फख्र की बात थी। वो तुरंत सलमान खान को राजकुमार से मिलवाने ले गए, लेकिन कामयाबी की खुशी में सलमान उन्हें पहचान नहीं सके। सलमान ने ठंडी प्रतिक्रिया दी और फिर दबे शब्दों में सूरज बड़जात्या से पूछा- ये कौन हैं। ये बात राजकुमार ने सुन ली और खुद जवाब देकर कहा- घर जाकर अपने अब्बा से जाकर पूछना, हम कौन हैं, फिर पता चलेगा। पास खड़े सूरज बड़जात्या ये सुनते ही सलमान को एक किनारे ले गए और राजकुमार के बारे में बताया। सलमान को तुरंत गलती का एहसास हुआ और उन्होंने दोबारा राजकुमार के पास आकर माफी मांगी।

दिलीप कुमार ने थप्पड़ मारा तो 33 साल नहीं की बात

इस फिल्म के ठीक एक साल बाद उनकी फिल्म पैगाम रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने दिलीप कुमार के बड़े भाई का रोल किया। एक सीन के लिए दिलीप कुमार को उन्हें थप्पड़ मारना था। एक्शन सुनते ही दिलीप कुमार ने पूरी ताकत से राजकुमार के गाल पर थप्पड़ मारा, जो उन्हें तेजी से लगा। राजकुमार, जिनके सामने लोग बोलने से भी कतराते थे, थप्पड़ पड़ते ही हिल गए। उन्होंने मान लिया कि दिलीप कुमार ने जानबूझकर ऐसा किया और दिलीप कुमार से दोस्ती खत्म कर दी। दोनों की 33 सालों तक बात बंद रही। दोनों ने इंडस्ट्री में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी।

मेरे बाद कोई बेहतर एक्टर है तो वो दिलीप कुमार है

फिल्म सौदागर की स्क्रिप्ट जब सुभाष घई ने दिलीप कुमार और राजकुमार के मुताबिक ही लिखी थी। जब दिलीप कुमार को फिल्म के लिए कॉल किया गया, तो उन्हें कहानी पसंद आई। लेकिन उन्होंने फिल्म करने की शर्त रखते हुए सुभाष घई से कहा था- शूटिंग के दौरान राजकुमार को संभालने की जिम्मेदारी आपको ही लेनी पड़ेगी। फिर जब सुभाष ने इसकी कहानी राजकुमार को सुनाई। जब ये बात उन्हें पता चली कि दिलीप कुमार इस फिल्म का हिस्सा हैं, तो वो बहुत खुश हुए। उन्होंने ये भी कहा- जानी, मैं इस इंडस्ट्री में अपने बाद किसी को बेहतर एक्टर मानता हूं, तो वो सिर्फ दिलीप कुमार ही हैं।

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