Moti Doongri Ganesh Temple : राजस्थान की राजधानी और गुलाबी नगरी जयपुर में लगभग तीन महीने की मेहनत से मोती डूंगरी गणेश मंदिर प्रशासन ने भगवान गणपति के गर्भगृह के मुख्य कपाट को सोने-चांदी से जड़कर भव्य स्वरूप दिया है. यह विशेष द्वार प्रथम पूज्य आराध्य मोती डूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और अध्यात्म को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. मंदिर में किए गए इस नए बदलाव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि दोपहर में जब मंदिर के पट बंद हो जाते हैं, तब भक्त भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाते और उन्हें कपाट खुलने का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में अब श्रद्धालु कपाट पर अंकित भगवान गणपति के अष्टविनायक स्वरूपों के दिव्य दर्शन कर सकेंगे।
11 किलो चांदी से बनाया गया 15 फीट का भव्य दरवाजा
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भक्तों के दर्शन के लिए बनाया गया यह दरवाजा बेहद खास और सुंदर है, जिसे शिल्पकारों ने करीब 15×12 फीट आकार में तैयार किया है. इस कलात्मक दरवाजे के निर्माण में 11 किलो चांदी का उपयोग किया गया है. दरवाजे पर सुंदर नक्काशी के रूप में अष्टविनायक के स्वरूपों के साथ मूषकराज, ध्वज की मनोहारी आकृतियां, पारंपरिक कलात्मक चित्रकारी तथा सूक्ष्म नक्काशी की गई है. मोती डूंगरी गणेश मंदिर के इस विशेष कपाट का निर्माण प्रसिद्ध कलाकार सत्यनारायण कश्यप एवं उनकी टीम ने लगभग तीन माह की कड़ी मेहनत से किया है. इस सुंदर द्वार को बनाने के लिए कलाकारों ने पहले डिजाइन तैयार कर उसे धातु पर उकेरा, फिर विशेष तकनीक से चांदी की परत चढ़ाकर प्रत्येक आकृति को जीवंत स्वरूप प्रदान किया. पांच से छह सदस्यीय टीम प्रतिदिन पांच से छह घंटे कार्य कर इस उत्कृष्ट शिल्प को आकार देने में जुटी रही, तब जाकर यह द्वार तैयार हुआ।
मंदिर के गर्भगृह में हुआ गोल्डन वर्क
मंदिर में भक्तों के लिए भव्य कपाट के अलावा गर्भगृह में भी लंबे समय से गोल्डन वर्क का कार्य चल रहा था, जो अब पूरा हो चुका है. गोल्डन वर्क के तहत गर्भगृह के भीतर 1 किलो और बाहरी हिस्सों में 7 किलो सहित कुल 8 किलो सोने का कार्य पूरा किया जा चुका है। गोल्डन वर्क के अलावा मंदिर के गर्भगृह में आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे रात्रि में भगवान के मुख्य विग्रह पर कोई परछाई नहीं पड़ेगी और श्रद्धालुओं को स्पष्ट दर्शन होंगे। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में कपाट, गोल्डन वर्क सहित विभिन्न सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। अब मंदिर में इस विशेष द्वार और गोल्डन वर्क को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.
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