Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियों के बीच हुई बातचीत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद-न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा,अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है. उनके शब्द पढ़िए:“अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें. कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा.लेकिन हमारे Compromised PM? चुप. एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं और आदेश मान लेते हैं. Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा-क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं,वो उन्हीं के वश में हैं.
अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद – न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है।
उनके शब्द पढ़िए: “अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।” कोई उल्लंघन “बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 14, 2026
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी साधा निशाना
खाड़ी क्षेत्र में US नेवी के हालिया हमलों को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और US सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो के बीच हुई फ़ोन पर बातचीत पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जयशंकर के पोस्ट से पता चलता है कि उन्होंने जो शब्द इस्तेमाल किए, वे सही नहीं थे.जिन लोगों ने आपके ही लोगों को मारा हो, उन्हें फटकारने का यह बहुत ही हल्का तरीका है. जबकि रुबियो का बयान हमारे प्रति बहुत कड़ा है.आपने हमारे लोगों को मारा है, आपको माफ़ी मांगनी होगी.अंतरराष्ट्रीय कानून हैं। किसी संघर्ष के दौरान आप किसी तीसरे देश के कमर्शियल जहाज़ पर हमला नहीं कर सकते. इसे सैन रेमो मैनुअल के तहत नियंत्रित किया जाता है. 1949 का जिनेवा कन्वेंशन और अतिरिक्त प्रोटोकॉल भी इसे नियंत्रित करते हैं. जयशंकर इतने माफ़ी मांगने वाले अंदाज़ में क्यों थे? हमने जानें गंवाई हैं. हमें माफ़ी की मांग करनी चाहिए थी,लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई बेइज्जती को देखिए.
S जयशंकर और मार्को रुबियो में क्या बातचीत हुई?
बता दें कि ओमान की खाड़ी में भारतीय कमर्शियल जहाज पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी.जिसपर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर विरोध जताया था.एस.जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई.मैंने खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के उन हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति दोहराई, जिनमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे.कमर्शियल शिपिंग के खिलाफ़ इस तरह की जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्को रुबियो को एस जयशंकर बात पसंद नहीं आई. उन्होंने संवेदना जताने की बजाय भारत को नसीहत दी है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले भारतीय जहाजों को बर्दाश्त नहीं करेगा. अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में लागू सुरक्षा और नौवहन संबंधी प्रतिबंधों का पालन सभी देशों के जहाजों को करना होगा.
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