Kinnar: समाज में अक्सर मनुष्य के दो ही रूप के बारे में ज्यादा बातें की जाती है. ये रूप है स्त्री और पुरुष, लेकिन ईश्वर ने मनुष्य का एक तीसरा रूप भी बनाया है, जिसे समाज में किन्नर कहा जाता है. समाज का एक बड़ा हिस्सा इनसे दूरी बनाकर रखता है। किन्नर समुदाय के कुछ ऐसे रहस्य भी हैं, जिनसे ज्यादातर लोग आज भी अनजान हैं। इन्हीं में से एक रहस्य है, किन्नरों के अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं। किन्नर समुदाय में शव यात्रा गुप्त रखी जाती है. इनका अंतिम संस्कार करने के बजाय इनको दफनाया जाता है. यही नहीं किन्नरों के अंतिम संस्कार से जुड़ी चीजें आधी रात में की जाती हैं।
शव यात्रा को गुप्त रखने के पीछे की मान्यता
किन्नरों की शव यात्रा अलग होती है. कहते हैं कि किन्नरों के शव को चार कंधों पर नहीं, बल्कि खड़ा करके ले जाया जाता है. किन्नरों की शव यात्रा और अंतिम संस्कार को गुप्त रखने के पीछे एक चौंका देने वाली मान्यता है. कहा जाता है कि अगर कोई किन्नरों की शव यात्रा या शव को देख लेता है, तो उसका अगला जन्म किन्नर योनि में हो सकता है. किन्नर किसी किन्नर की मृत्यु पर शोक नहीं, बल्कि उत्सव मनाते हैं. किन्नरों का मानना है कि मृत्यु को प्राप्त करने वाले की आत्मा जीवन के कष्टों से मुक्त हो गई है. इस दौरान किन्नर अपने आराध्य देव इरावन की पूजा करके प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा अगली बार किन्नर रूप में न जन्मे. अंतिम संस्कार के बाद किन्नर समुदाय में एक हफ्ते का व्रत भी रखा जाता है और मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की जाती है.
शव को दफनाने की है परंपरा
हिंदू धर्म में शव का दाह संस्कार किए जाने की परंपरा है, लेकिन किन्नरों के शव को जलाया नहीं जाता, बल्कि दफनाया जाता है. किन्नर अंतिम संस्कार से पहले शव को सफेद कपड़े में लपेटते हैं. इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि शरीर पर कोई बंधन न हो, ताकि आत्मा को मुक्ति प्राप्त हो सके. गरुड़ पुराण के अनुसार, किन्नरों को यक्ष और गंधर्वों के समान स्थान दिया गया है।
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