Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई के बीच मुलाकात हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह अंतरराष्ट्रीय जगत में सबसे बडी मुलाकात होगी जो विश्व युद्व की संभावना से परेशान हो रही दुनिया राहत की सांस लेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो वह ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से मिलने के लिए तैयार हैं। इसी बीच भारत ने लेबनान में यूएन के शांति सैनिकों पर हमले की निंदा की है।
खामनेई से मिलने में दिक्कत नहीं
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि मैं सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से मिलना नहीं चाहता, लेकिन अगर मुलाकात होती है तो मुझे गर्व होगा। अगर डील हो जाती है तो मुलाकात संभव है। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। ट्रम्प ने यह भी कहा कि कोई भी संभावित मुलाकात सम्मानजनक होगी और मैं ईरान के सुप्रीम लीडर से इज्जत से पेश आऊंगा।
यूरेनियम के लिए योजना खारिज
इसके अलावा, ट्रम्प ने बताया कि उनकी सरकार ने ईरान से संवर्धित (एनरिच्ड) यूरेनियम हासिल करने के लिए सैनिक भेजने पर विचार किया था, लेकिन यह योजना अंत में खारिज कर दी गई। ट्रम्प के मुताबिक, यह ऑपरेशन बहुत ज्यादा जोखिम भरा था और इसमें अमेरिकी सैनिकों की जान जाने की आशंका थी। इसलिए इसे आगे नहीं बढ़ाया गया।
भारत ने लेबनान में यूएन शांति सैनिकों पर हमले की निंदा की
भारत ने लेबनान में यूएन शांति सैनिकों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले में सर्बिया के एक ब्लू हेलमेट सैनिक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। लेबनान में तैनात सर्बियाई शांति सैनिक सार्जेंट मिलोवान जोवानोविच की मौत दक्षिणी लेबनान के मारजायून इलाके में बम हमले के बाद हुई। घायलों में स्पेन और एल साल्वाडोर के शांति सैनिक शामिल हैं, जिनका इलाज मेडिकल सुविधा में चल रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि, इस हमले की तुरंत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।
भारत ने कहा कि यूएन परिसरों और शांति सैनिकों की सुरक्षा का सम्मान किया जाना बेहद जरूरी है। साथ ही सभी पक्षों से शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि, शांति सैनिकों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं और इन्हें युद्ध अपराध माना जा सकता है।
अमेरिकी नाकेबंदी के बीच इराक के जरिए व्यापार कर रहा ईरान
इराक का उम्म कसर बंदरगाह ईरान जाने वाले माल के लिए एक नया ट्रांजिट हब बनकर उभरा है। इराक का उम्म कसर बंदरगाह ईरान जाने वाले माल के लिए एक नया ट्रांजिट हब बनकर उभरा है।अमेरिका की नाकाबंदी के बाद ईरान को सामान पहुंचाने में दिक्कतें बढ़ गई हैं। शुरुआत में ईरान ने ओमान के खासाब बंदरगाह को एक वैकल्पिक रास्ते के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया था। लेकिन वहां अब जहाजों की भीड़ बढ़ गई है, जिससे माल उतारने-चढ़ाने में ज्यादा समय लग रहा है और खर्च भी बढ़ गया है। अब ईरान के लिए भेजा जाने वाला कुछ सामान, जैसे कारें, पहले यूएई के बंदरगाहों तक पहुंचाया जा रहा है। वहां से इन्हें गैर-ईरानी जहाजों के जरिए इराक के उम्म कसर बंदरगाह ले जाया जाता है और फिर आगे ईरान भेजा जाता है। इस तरह इराक का यह बंदरगाह ईरान के लिए नया ट्रांजिट रूट बनता जा रहा है। व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, ओमान ने कुछ सामानों पर अतिरिक्त शुल्क भी लगाना शुरू कर दिया है, जिससे खासाब रूट और महंगा हो गया है। इसी वजह से अब इराक का उम्म कसर बंदरगाह ईरान के लिए एक अहम विकल्प बनकर उभर रहा है, ताकि प्रतिबंधों और नाकाबंदी के बावजूद व्यापार जारी रखा जा सके।
ईरान ने बच्चों की मौत पर घेरा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने गाजा, वेस्ट बैंक, बेरूत और ईरान समेत कई जगहों पर बच्चों की मौत को लेकर अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पोस्ट में बघाई ने पूछा, “मासूम बच्चों को किस अपराध की सजा दी जा रही है?” उन्होंने कहा, “गाजा और वेस्ट बैंक से लेकर बेरूत, मिनाब और तेहरान तक, अमेरिकी और इजराइली बमों और मिसाइलों से बच्चे मारे गए हैं। कोई सैन्य लक्ष्य, राजनीतिक हित या सुरक्षा का बहाना बच्चों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकता। बच्चे युद्ध का हिस्सा नहीं होते।”
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