Mallikarjun Kharge: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज (19 मई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के दाम बार-बार बढ़ाए जा रहे हैं. विश्व युद्ध जैसी स्थिति है. अमेरिका, ईरान, इजरायल में हो रही जंग को देखते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हमारे घर में सब ठीक है. डॉलर की कीमत वैसे की वैसे है लेकिन रुपये की कीमत गिर रही है. ये आर्थिक दृष्टि से पीएम मोदी फेलियर है. दूसरा उन्हें जो विजन रखना चाहिए उसके बारे में भी नहीं सोचा. वे खुद बोलते हैं कि विदेश दौरा न करें और खुद 5 देशों के दौरे पर हैं. किन-किन देशों से आपने समझौता किया, किन-किन देशों के साथ एमओयू किया. कितना निवेश हुआ, कहां-कहां हुआ, ये देश के लोगों को बताना चाहिए.
X पर पोस्ट जरिए भी साधा निशाना
मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा कि दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम फिर बढ़ा दिए. पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है. आम जनता की लूट और अडानी को अमरीका से छूट” ये है मोदी का Compromised Model. विश्वगुरु का झूठा दंभ भरने वाले मोदी ने अमरीका से हाथ-पैर जोड़कर रूसी तेल ख़रीदने की “Permission” का एक महीने का Extenstion लिया है. हर बार ऐसा करके वो 140 करोड़ भारतीयों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाते हैं. ऐसा पहला किसी पिछली सरकार ने नहीं किया है. अब सवाल है कि जब सरकार के हिसाब से हमें ये “Allow” हो गया है तो फिर आम जनता पर पेट्रोल-डीज़ल के दामों का बोझ क्यों?
दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम फिर बढ़ा दिए।
पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर
अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है।“आम जनता की लूट और अडानी को अमरीका से छूट” ये है मोदी जी का Compromised Model
विश्वगुरु का झूठा दंभ…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) May 19, 2026
“भाजपा में दूरदर्शिता और Leadership की कमी है”
खरगे ने पोस्ट में आगे लिखा कि मैं एक बार फिर दोहराता हूं. भाजपा में दूरदर्शिता और Leadership की कमी है. जब Crisis आई, तब चुनावों में व्यस्त रहे, फिर चिकनी-चुपड़ी बातें कर लूट का प्लान बनाया. इसी बीच अपने परम मित्र को भी छुड़वा लिया. केवल विदेशों में प्रायोजित PR करने से “विश्वगुरु” नहीं बना जाता. पीएम मोदी जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी पड़ती है. असली सवालों से मत भागिए. इन्हें आप ‘आम कैसे खाते हैं’ और ‘टॉनिक कौन सा पीते हैं’ उनसे कोई मतलब नहीं है. अगर जवाब देंगे कि Crisis के लिए खुद क्या कर रहें हैं तभी जनता के असली “प्रधान सेवक” कहलाएंगे, वरना महज़ ‘प्रचारक’ बनकर ही रह जाएंगे.



