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White House का आरोप-चीन चुरा रहा है अमेरिका का एडवांस AI मॉडल्स का डिजिटल ब्लूप्रिंट

White House blame china

White House : दुनिया की दो महाशक्तियां चीन और अमेरिका के बीच लेटेस्ट टेक्नोलॉजी AI को लेकर आगे रहने की होड मची है। एक तरफ अमेरिका AI की रेस में आगे निकलना चाहता है तो वहीं दूसरी तरफ चीन भी इस रेस में बढ़त बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. अमेरिकी White House की ताजा रिपोर्ट ने पूरी टेक इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है. व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ने दावा किया है कि चीन ने चोरी-छिपे अमेरिका के सबसे शक्तिशाली AI मॉडल्स का डिजिटल ब्लूप्रिंट बना लिया है. अमेरिका का आरोप है कि चीन बिना मेहनत किए दुनिया का एआई सुपरपावर बनने की कोशिश कर रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि White House ने गुरुवार को चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चीनी हैकर्स और कंपनियां बड़े पैमाने पर अमेरिकी AI Labs से बौद्धिक संपदा चुराने की कोशिश कर रही हैं.

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट से जारी जानकारी के अनुसार अमेरिका के White House के ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के डायरेक्टर माइकल क्रैट्सियोस ने एक आधिकारिक मेमो जारी किया है. इस मेमो में कहा गया है कि चीन स्थित संस्थाएं अमेरिकी फ्रंटियर एआई मॉडल्स, जो सबसे एडवांस सिस्टम है, उसे कॉपी करने के लिए एक विशेष अभियान चला रही है. यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बीजिंग में मुलाकात करने वाले हैं. जानकारों का मानना है कि इस खुलासे के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है.

कैसे हो रही टेक्नोलॉजी की चोरी?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक चीन डिस्टिलेशन नाम की एक खास टेक्नोलॉजी का सहारा ले रहा है. इसमें किसी बड़े और एडवांस एआई जैसे ओपन एआई का चैट जीपीटी को लाखों सवाल भेजे जाते हैं और उसके जवाबों आउटपुट का एनालसिस किया जाता है. इन लाखों सवालों के जवाब के आधार पर चीन अपने छोटे और सस्ते एआई मॉडल्स को ट्रेन कर रहा है. इससे उन्हें बिना सालों की मेहनत और अरबों डॉलर खर्च किए, अमेरिका जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी मिल रही है. हैकर्स नकली अकाउंट्स और जेलब्रेकिंग के जरिए एआई के सुरक्षा घेरे को तोड़कर गोपनीय जानकारी निकाल रहे हैं.

यह भी पढ़ें : China ने AI टेक्नोलॉजी में अमेरिका को किया पीछे, DeepSeek V4 किया लॉन्च

दिग्गज कंपनियों ने जताई चिंता

व्हाइट हाउस ही अकेले नहीं, बल्कि OpenAI और Anthropic जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों ने भी शिकायत की है कि चीनी स्टार्टअप्स जैसे DeepSeek और Moonshot AI उनके सिस्टम को टारगेट कर रहे हैं या टारगेट करने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि साल 2024 में गूगल के एक पूर्व इंजीनियर पर भी चीन के लिए AI सीक्रेट्स चुराने का आरोप लग चुका है.

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चीन का पलटवार

व्हाइट हाउस के आरोपों और इस पूरे मामले को लेकर वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. चीन के अनुसार बौद्धिक संपदा के अधिकारों का सम्मान करते हैं और अमेरिका बिना सबूत के उन पर इल्जाम लगा रहा है.

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