Nari Shakti Vandan Sammelan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आज (13 अप्रैल) दिल्ली के विज्ञान भवन में नेशनल लेवल के ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में शामिल हुए. अपने संबोधन के दौरान PM मोदी ने कहा कि देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है. मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक महत्वपूर्ण निर्णय ये है. ये निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है. नारी शक्ति वंदन को समर्पित है. उन्होंने कहा कि हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतामूलक हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो.
“महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे”
प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने कहा कि राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17, 18 अप्रैल है. 2023 में नई संसद में हमने नारीशक्ति वंदन अधिनियम के रूप प्रथम कदम उठाया था. वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है और उससे पहले आज नारीशक्ति वंदन का ये कार्यक्रम, इसके जरिए हमें देश की कोटि-कोटि माताओं बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है. उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि जिस प्रकार से इस अधिनियम को पारित किया गया था और संसद का गौरव बढ़ा था. इस बार भी सबके सामूहिक प्रयास से संसद की गरीमा और नई ऊंचाइयों को छुएगी. देश की हर नारी को अच्छा लगेगा कि हर दल ने राजनीति से ऊपर उठकर उनके हित में ये महत्वपूर्ण निर्णय लिया है काम किया है.
उन्होंने कहा कि हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक महिलाएं जहां भी रही हैं. उन्होनें अपनी अलग लिगेसी बनाई है. इस समय भी हमारे देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक ऐसे अहम पद महिलाएं ही संभाल रही हैं. उन्होंने देश की गरिमा और गौरव दोनों को बढ़ाया है.
“महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण पंचायती राज संस्थाएं भी हैं”
PM मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि हमारे देश में महिला नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण पंचायती राज संस्थाएं भी हैं. आज भारत में 14 लाख से अधिक महिलाएं लोकल गवर्नमेंट बॉडीज में सफलतापूर्वक काम कर रही हैं. लगभग 21 राज्यों में तो पंचायतों में उनकी भागीदारी करीब-करीब 50% तक पहुंच चुकी है. लाखों महिलाओं की राजनीति और सामाजिक जीवन में ये सक्रियता, दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं और राजनीति के विशेषज्ञों के लिए भी बहुत ही हैरान करने वाली बात होती है. इससे भारत का गौरव बहुत बढ़ता है. अनेक अध्ययनों में ये सामने आया है कि जब निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की सहभागिता बढ़ी, तो इससे व्यवस्थाओं में भी संवेदनशीलता आई है.
“महिलाएं देश की मुख्यधारा और अर्थव्यवस्था से जुड़ीं”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि भारत की प्रगति, भारत के विकास और भारत की वैश्विक पहचान का केंद्र भारत की महिलाएं हो सकती हैं इसी नव विचार के साथ देश को निरंतर आगे बढ़ाने का काम कर रहे हमारे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का मैं दिल की गहराइयों से आज के इस आयोजन में स्वागत करती हूं. इस नए युग की शुरुआत 2014 में हुई आपके आने के बाद, जब सरकार की हर योजना की धुरी परिवार की महिला बनी. परिवार की महिलाओं को केंद्र में रखकर, आपने सभी नीतियां और योजनाएं बनाईं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री , हम सब जितने लोग यहां बैठे हैं, हमने हमेशा अपनी माताओं को अपनी छोटी-छोटी बचत कहीं चावल के डिब्बे में, कहीं दाल के डिब्बे में रखते हुए देखा है. लेकिन आपके आने के बाद करोड़ों जनधन खातों के माध्यम से महिलाएं देश की मुख्यधारा और अर्थव्यवस्था से जुड़ीं. उनके खाते खुले, उनके खातों में सीधे पैसे डाले गए.
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“साधारण परिवार की बेटी को मौका दिया”
सीएम गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि अवसर मिलने पर देश की महिला भी मुश्किल से मुश्किल काम को शानदार तरीके से करने की ताकत रखती है और करने की क्षमता रखती है. आपने हमें यह विश्वास दिया है. मैं तो स्वयं इसका साक्षात उदाहरण हूं जब आपने देश की राजधानी की मुख्यमंत्री के रूप में मुझ जैसी साधारण परिवार की बेटी को मौका दिया, मुझे चुना और इस दिल्ली राज्य की जिम्मेदारी दी.
“अपनी बेटियों को नेतृत्व के लिए तैयार करें”
‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी (Annapurna Devi)ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम हमारी मातृ शक्ति के सालों के संघर्ष और साधना के लोकतांत्रिक सिद्धि का महापर्व है. यह महिलाओं के सामर्थ्य आत्म सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी को सुनिश्चित करने वाला युगांतकारी परिवर्तन है. इस अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय परिदृश्य को नया स्वरूप देने का अब सही समय है. राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में नारी शक्ति का यह वंदन भारत की नियति को एक नया मार्ग दिखाने वाला है. अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम संकल्प को सार्थक प्रतिनिधित्व में बदलें और अपनी बेटियों को नेतृत्व के लिए तैयार करें.



