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क्या RO का पानी लंबे समय तक पीना सही है?

RO Water Mineral Deficiency

RO Water Mineral Deficiency: आजकल ज्यादातर घरों में पीने के लिए RO वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाता है। लोग इसे सबसे सुरक्षित और साफ पानी मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि RO से फिल्टर किया गया पानी गंदगी हटाने के साथ-साथ कुछ जरूरी मिनरल्स को भी कम कर सकता है? दरअसल RO प्रक्रिया के दौरान पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक खनिज काफी हद तक फिल्टर हो जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की डाइट संतुलित नहीं है तो लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से शरीर के मिनरल संतुलन और हड्डियों की सेहत पर असर पड़ सकता है।

RO फिल्ट्रेशन सिस्टम पानी से अशुद्धियां तो निकाल देता है लेकिन इसके साथ-साथ कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ जरूरी मिनरल्स भी कम हो जाते हैं। हालांकि उनका कहना है कि आमतौर पर पानी इन पोषक तत्वों का मुख्य स्रोत नहीं होता। ज्यादातर मिनरल्स हमें भोजन से ही मिलते हैं। अगर कोई व्यक्ति दूध और डेयरी प्रोडक्ट, दालें, मेवे, बीज और हरी सब्जियां जैसी चीजें नियमित रूप से खाता है तो सिर्फ RO पानी पीने से मिनरल्स की कमी होने की संभावना काफी कम रहती है। समस्या तब हो सकती है जब किसी की डाइट पहले से ही पोषण के मामले में कमजोर हो।

WHO ने भी दी है चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत कम TDS वाला पानी लंबे समय तक पीना सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता। WHO की रिपोर्ट Nutrients in Drinking Water में बताया गया है कि अगर पानी में खनिज तत्व पूरी तरह खत्म हो जाएं तो यह धीरे-धीरे सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अगर पानी का TDS स्तर 50 से भी कम हो तो इससे शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो सकती है। मैग्नीशियम की कमी से हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

WHO यह भी बताता है कि बहुत कम TDS वाला पानी रासायनिक रूप से अस्थिर हो सकता है। ऐसे में यह जिस पाइप या बर्तन में रखा जाता है वहां से धातुओं को अपने अंदर घोल सकता है जिससे शरीर में भारी धातुओं के पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर में मिनरल्स की कमी कैसे पता चले?

शरीर में मिनरल्स की कमी का पता लगाने के लिए कुछ मेडिकल टेस्ट करवाए जा सकते हैं, जैसे—

  • सीरम कैल्शियम टेस्ट
  • मैग्नीशियम टेस्ट
  • विटामिन D टेस्ट
  • किडनी फंक्शन टेस्ट
  • इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट

अगर किसी को मांसपेशियों में ऐंठन, ज्यादा थकान या हड्डियों में दर्द जैसे लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर की सलाह से ये जांच करवाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बोन डेंसिटी स्कैन भी कराया जा सकता है।

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पानी का सही TDS कितना होना चाहिए?

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के अनुसार पीने के पानी का TDS स्तर आमतौर पर 250 से 500 mg/L के बीच होना बेहतर माना जाता है।

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क्या सावधानी रखनी चाहिए?

अगर आप लंबे समय से RO का पानी पी रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है—

  • डाइट में कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर चीजें शामिल करें
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे और प्रोटीन का सेवन बढ़ाएं
  • जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
  • RO में मिनरल कार्ट्रिज लगवाया जा सकता है
  • री-मिनरलाइज्ड RO सिस्टम का इस्तेमाल भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है
Disclaimer:

यह खबर सामान्य जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। अपनी सेहत और पानी की गुणवत्ता से जुड़े किसी भी फैसले से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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