Nitesh Narayan Rane: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश नारायण राणे के बयान पर सियासत तेज होती जा रही है. उत्तर प्रदेश से कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के बयान पर कहा कि नितेश राणे मानसिक रूप से असंतुलित हो गए हैं, इसलिए वे ऊल-जलूल बकते हैं, देश के संविधान के खिलाफ बकते हैं. इन्हीं मदरसों से निकलकर तमाम मौलाना और मौलवी ने जंग-ए-आजादी में हिंदुस्तान को आजाद कराने का काम किया है. इस तरीके से मदरसों को आतंकी अड्डे बताकर नितेश राणे देश के संविधान का मखौल उड़ा रहे हैं. ऐसे मानसिक असंतुलित व्यक्ति को विधानसभा में रहने का या मंत्री बने रहने का कोई हक नहीं है, इसको तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए.
“मदरसों का जो काम है, उन्हें वही काम करना चाहिए”
बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि हम सब जानते हैं कि मदरसों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. वास्तव में, मदरसे शिक्षा देने और संस्कार देने के लिए बनाए गए थे। हाल ही में जो गतिविधियां हुई हैं, जिनमें कुछ मदरसों का भी ज़िक्र है, ये बहुत चिंता की बात हैं. मुझे लगता है कि मदरसों का जो काम है, उन्हें वही काम करना चाहिए.
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“अपनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता”
झारखंड से भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि देखिए, हम एक चीज़ तो मानते हैं, भले ही हम उनकी बात से पूरे तरीके से सहमत नहीं हैं, लेकिन एक चीज़ तो सचमुच है कि मदरसा जिन चीज़ों के लिए बनाया गया था, वो पूरे तरीके से अपनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता है. आप बताएं, मदरसे से कितने डॉक्टर, इंजीनियर्स और कितने आईएएस, आईपीएस ऑफिसर्स या आईआईएम में जाने वाले लोग निकले हैं. मदरसे में इस तरीके से तालीम दी जाती है कि लोगों की विचारधारा बड़ी संकुचित हो जाती है.
नितेश नारायण राणे ने क्या कहा था?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश नारायण राणे ने मालेगांव नगर निगम के विद्युत विभाग में नमाज अदा करने पर कहा यह हमारा हिंदू राष्ट्र है. हमारे राष्ट्र में किसी को भी इस तरह से धर्म का पालन करने, उपदेश देने या जिहाद करने की इजाज़त नहीं है. इनको ये नाटक किसी इस्लाम राष्ट्र में जाकर करना चाहिए. इनको मालेगांव के विकास के लिए चुना है कि जिहाद करने के लिए चुना है? उन्होंने कहा कि इसलिए मैं बार-बार कहता हूं, ये मदरसे आतंकवादियों को तैयार करने के अड्डे हैं. इसका शिक्षा से कोई संबंध नहीं है. अगर हमने किसी इस्लामिक देश में भगवद् गीता पढ़ाने की ऐसी पहल की होती, तो क्या हमें इजाज़त मिलती?
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