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विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर PM मोदी, शाह समेत तमाम बड़े नेताओं ने किया याद, क्या कहा?

Veer Savarkar Death Anniversary

Vinayak Damodar Savarkar Death Anniversary: देश के स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की आज पुण्यतिथि है. 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हो गया था. 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में सावरकर का जन्म हुआ था. वे कुशल राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक और समाज सुधारक थे. वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर देश के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें याद किया है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि महान क्रांतिकारी वीर सावरकर जी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व हर पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा.

“राष्ट्रप्रेमी के लिए राष्ट्रप्रथम का ज्योति स्तंभ बना रहेगा”
वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर आजादी के आंदोलन के उन नायकों में थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्रता व सांस्कृतिक स्वाधीनता के लिए एक साथ संघर्ष किया. उन्होंने एक तरफ अपने क्रांतिकारी विचारों से आजादी के आंदोलन को वैचारिक आधार दिया, वहीं देश से लेकर इंग्लैंड तक, अपने साहसी अभियानों से युवाओं की प्रेरणा बने. अस्पृश्यता उन्मूलन व नारी शिक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले वीर सावरकर के त्याग, समर्पण व वीरता की गाथाएं अनंत काल तक हर एक राष्ट्रप्रेमी के लिए राष्ट्रप्रथम का ज्योति स्तंभ बना रहेगा.

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“आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरणा देते हैं”
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि वीर विनायक सावरकर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन. उनका अदम्य साहस, अद्वितीय त्याग और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गौरवपूर्ण अध्याय है. उनका जीवन और उनके ओजस्वी विचार आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरणा देते हैं.

“उनका जीवन सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा”
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Navin) ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि आज वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उस युगद्रष्टा क्रांतिकारी को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को वैचारिक धार और संगठनात्मक दिशा प्रदान की. लंदन के इंडिया हाउस से लेकर सेल्युलर जेल की कालकोठरी तक, उनका जीवन केवल संघर्ष की कथा नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना के पुनर्जागरण की गाथा है. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अपनी अवधारणा के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय अस्मिता को वैचारिक आधार दिया और स्वाभिमानी भारत का स्वप्न स्पष्ट किया. उनका तप, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा हमें यह स्मरण कराती है कि स्वतंत्रता केवल प्राप्त अधिकार नहीं, बल्कि सतत साधना का संकल्प है. राष्ट्र की अखंडता, अस्मिता और आत्मगौरव के लिए उनका जीवन सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा.

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