Electricians : आने वाले समय में युवाओं के लिए बडी चुनौती आने वाली है। जो युवा कंम्प्यूटर पर एआई की दुनिया में हैं उनसे कहीं ज्यादा इलेक्ट्रिशियन की मांग कंपनियों में बढने वाली है। टेक इंडस्ट्री में एआई ने जहां लाखों सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और आईटी वर्कर्स की नौकरियां खतरे में किया हैं, वहीं बड़ी-बड़ी एआई कंपनियां अब कोडिंग करने वालों से ज्यादा तवज्जो और पैसा इलेक्ट्रीशियन्स को दे रही हैं. भारत में अभी विस्तार होना बाकी है लेकिन विदेशों में 30 साल से कम उम्र के जेन जी इलेक्ट्रीशियन्स को सालाना 2.7 करोड़ रुपये तक का पैकेज दिया जा रहा है. युवा आज टेक सेक्टर के सबसे महंगे एम्प्लॉई बन चुके हैं. आखिर एआई की दुनिया में बिजली के कारीगरों की मांग इतनी तेजी से क्यों बढ़ गई है-
व्हाइट कॉलर पर मंदी, ब्लू कॉलर की चांदी
इस साल अमेज़न, मेटा, ओरेकल और टीसीएस जैसी दिग्गज कंपनियों से 1,20,000 से ज्यादा टेक कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं. एआई टूल्स के आने से जहां व्हाइट कॉलर (कार्यालयी) नौकरियों पर असर पड़ा है, वहीं ब्लू कॉलर (शारीरिक श्रम वाले) कामों की मांग में रिकॉर्ड उछाल आया है. डर्टी जॉब्स शो के होस्ट माइक रोव के अनुसार, अमेरिका के टेक्सस में डेटा सेंटर्स में काम करने वाले 30 साल से कम उम्र के युवाओं को कंपनियां 240,000 डॉलर (लगभग 2.3 करोड़) से 280,000 डॉलर (लगभग 2.7 करोड़) रुपये का पैकेज खुशी-खुशी दे रही हैं. इन युवाओं पर न कोई स्टूडेंट लोन है और न ही नौकरी जाने का डर.
एआई को चलाने के लिए क्यों चाहिए इलेक्ट्रीशियन?
लोगों को लगता है कि एआई सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन और कोड पर चलता है, लेकिन असलियत कुछ और है. एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए विशालकाय एआई डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है. इन डेटा सेंटर्स में हजारों हाई-पावर जीपीयू लगे होते हैं, जिन्हें 24 घंटे चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और जटिल इलेक्ट्रिकल सेटअप की आवश्यकता होती है. इसी बुनियादी ढांचे को खड़ा करने और मेंटेन करने के लिए कंपनियों को कुशल इलेक्ट्रीशियन्स, वेल्डर्स और कंस्ट्रक्शन मैनेजर्स की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ रही है.
32% ज्यादा सैलरी और भारी स्किल शॉर्टेज
फार्च्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आम कंस्ट्रक्शन साइट्स की तुलना में डेटा सेंटर्स के प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को 32 प्रतिशत ज्यादा सैलरी मिल रही है. टर्नर एंड टाउनसेंड के एक सर्वे के अनुसार, दुनिया भर के 71 प्रतिशत बाजारों में डेटा सेंटर्स के लिए स्किल्ड कर्मचारियों की भारी कमी है. डेलॉयट के आंकड़ों से पता चलता है कि डेटा सेंटर से जुड़ी नौकरियों में 64 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि इलेक्ट्रिकल तकनीशियनों की मांग में 180 प्रतिशत से अधिक की अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है.
भारत में भी जल्द दिखेगा इसका असर
यह ट्रेंड सिर्फ विदेशों तक सीमित नहीं रहने वाला है. भारत में भी गूगल विशाखापत्तनम में 15 बिलियन का एआई हब बना रहा है, जबकि मेटा रिलायंस जीओ के साथ मिलकर अपने बड़े डेटा सेंटर्स स्थापित कर रहा है. जैसे-जैसे भारत में डेटा सेंटर्स का नेटवर्क फैलेगा, यहां भी कुशल इलेक्ट्रीशियन और तकनीशियनों की मांग आसमान छूने वाली है. एआई के इस दौर में सिर्फ स्क्रीन के पीछे बैठना ही नहीं, बल्कि जमीन पर रहकर तकनीकी ढांचे को संभालना सबसे बड़ा और सुरक्षित करियर विकल्प बनता जा रहा है.
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