Sachin Pilot News: कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. मीडिया से बातचीत के दौरान पायलट ने कहा कि सरकार लाखों-करोड़ों नौजवानों के सपनों को बर्बाद करने का काम कर रही है. जिस घमंड और आक्रमण की राजनीति का परिचय दिया जा रहा है वो बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है. कल दोनों प्रतिपक्ष नेता राज्यसभा से मल्लिकाअर्जुन खरगे और लोकसभा से राहुल गांधी धरने पर बैठे थे उनके साथ जैसा व्यवहार किया गया सभी ने देखा. वो कोई आतंकवादी नहीं है. वो कोई एंटी सोशल एलिमेंट्स नहीं है.
“शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए”
सचिन पायलट ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए. बच्चों पर FIR की है वो वापस होनी चाहिए. सैकड़ों बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं जिनके हाथ-पैर टूटे हुए है. 2 बच्चे वेंटिलेटर पर भी है. छात्रों पर बर्बरतापूर्ण आंसू गैस के गोले दागे जा रहे हैं, लाठीचार्ज हो रहा है, FIR दर्ज की जा रही है. इसको देखकर कौन इंसान घर बैठ सकता है. छात्रों को न्याय मिलना चाहिए. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए. जितने बच्चों ने आत्महत्या की है उनके परिवारों को सहायता मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य के लिए क्या खाका तैयार करेगी. जो व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई है. क्या इसको देखकर कुछ न करें. कांग्रेस नेताओं ने लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन किया तो क्या गलत किया?
“सरकार के रवैये का जनता जवाब देगी”
उन्होंने कहा कि एक मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) के विभाग को लेकर इतनी जिद, अड़ियल रवैया क्यों अपनाया जा रहा है, यह अलोकतांत्रिक है. जिस तरीके से राहुल और प्रियंका गांधी को सड़कों पर ऊपर घसीटा गया ये पुलिस के दमन का परिचय है. इसके खिलाफ पूरे देश में आक्रोश है. यह सिर्फ एक पार्टी की बता नहीं है बल्कि पूरे देश के तमाम नौजवान, पूरा विपक्ष चाहता है कि सरकार अपना रवैया छोड़े, जिद छोड़े, अहंकार छोड़े और न्याय लोगों को दिलाए. पायलट ने कहा कि हम युवाओं के लिए पूरे देश में संघर्ष कर रहे हैं. सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का काम कर रही है. ऐसा आज से पहले नहीं हुआ, पहले नेता प्रतिपक्ष होते थे, संवाद होता था, चर्चा होती थी, लेकिन आजकल उठाना, घसीटना, बसों में डालना, थाने में बंद कर देना, घंटों तक बंद रखना सरकार के इस रवैये का जनता जवाब देगी.
“युवाओं के प्रति अपने रुख को बदलना पड़ेगा”
वहीं जब पायलट से पूछा गया है कि प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने की परंपरा खतरनाक है. इसपर उन्होंने कहा कि धरना देना, भूख हड़ताल करना, मांगों को रखना, यह अधिकार संविधान ने हमें दिया है. आप चाहे जिसको जेल में डाल देते हैं, चाहे किसी पर केस कर देते हैं. लेकिन जवाब देने को आप तैयार नहीं है. क्या सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है. सरकार को युवाओं के प्रति अपने रुख को बदलना पड़ेगा. 12 साल सत्ता में रहने के बाद भी उनको लग रहा है कि जनता की कोई अहमियत नहीं है. गरीब हो, नौजवान हो, किसान हो सब परेशान है. शहरी हो या ग्रामीण हर नौजवान को लगता है कि उसे ठगा जा रहा है. युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है. पेपर लीक होता है किसको जाकर रोएं, जो बच्चे दिल्ली में प्रदर्शन करने के लिए आए उन्होंने क्या जुर्म किया, जो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया. कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है. अब जाकर सरकार संसद में चर्चा करने को तैयार हुई है. लेकिन शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जब तक नहीं होगा, तब तक हमारी मांग पूरी नहीं होगी.
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