Mallikarjun Kharge on PM Modi: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कहकर नया विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्नादुराई की विचारधारा को मानने वाले लोग मोदी के साथ कैसे जा सकते हैं जो समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखते. खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी के साथ एआईएडीएमके लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और पीएम मोदी की गुलाम बन गई है. हालांकि विवाद बढ़ता देख खरगे ने स्पष्ट किया कि उनका मतलब व्यक्तिगत आतंकवादी कहना नहीं बल्कि यह था कि प्रधानमंत्री हमेशा दूसरों को आतंकित करते हैं. इसके बावजूद खरगे के बयान पर बीजेपी लगातार हमलावर है. राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पीएम मोदी के लिए प्रयोग की गई आपत्तिजनक एवं अशोभनीय शब्दावली न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की भावनाओं को भी आहत करने वाली है.
मदन राठौड़ ने आगे लिखा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इस प्रकार की भाषा कांग्रेस की वैचारिक शून्यता और राजनीतिक हताशा को दर्शाती है. लगातार व्यक्तिगत टिप्पणियां करना और मर्यादाओं को लांघना अब कांग्रेस की आदत बन चुकी है. कांग्रेस को इस बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए.
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“यह दुर्भाग्यपूर्ण है”
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरा मानना है कि राहुल गांधी की नफरत फैलाने वाली राजनीति, और उन्होंने जिस तरह की राजनीतिक परंपरा शुरू की है कि देश में विद्वेश पैदा करना, देश को इस तरह बांटना, उसका प्रभाव अब उनकी पार्टी के निचले स्तर के सदस्यों पर भी देखने को मिल रहा है. यह कांग्रेस पार्टी के चाल, चरित्र और चेहरे को जनता के सामने बेनकाब कर रहा है.
“मुद्दों से भटककर स्तरहीन राजनीति पर उतर आई है”
डिप्टी सीएम दीया कुमार ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पीएम मोदी के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना कांग्रेस की संकीर्ण मानसिकता और सुनियोजित राजनीति को दर्शाता है, जो अत्यंत निंदनीय एवं शर्मनाक है. लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इस प्रकार की अमर्यादित भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वस्थ संवाद की भावना के विपरीत है. कांग्रेस पार्टी का यह आचरण स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह जनहित के मुद्दों से भटककर स्तरहीन राजनीति पर उतर आई है. देश की जनता इस तरह की राजनीति को भली-भांति समझती है और समय आने पर इसका जवाब देती है. राजनीति में शालीनता, मर्यादा और राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए.



