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परिसीमन विधेयक पर राजस्थान में सियासत, टीकाराम जूली ने खड़े किए सवाल, मंत्री बेढम ने किया पलटवार

Jawahar Singh Bedham

Delimitation Bill 2026: लोकसभा में चर्चा करने और पारित करने के लिए गुरुवार को संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 तथा परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किए गए. जिसको लेकर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि परिसीमन जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की चुप्पी प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ है. यह विषय राजस्थान के राजनीतिक और लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा हुआ है, जिस पर तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाकर ठोस निर्णय लिए जाने चाहिए. इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों की राय ली जाए और अविलंब सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए, ताकि परिसीमन के तकनीकी व राजनीतिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हो सके.

“परिसीमन का राजस्थान पर व्यापक असर पड़ेगा”
टीकाराम जूली ने आगे लिखा कि राजस्थान के हक और यहां की जनता के प्रतिनिधित्व के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा. परिसीमन का राजस्थान पर व्यापक असर पड़ेगा. इससे लोकसभा और विधानसभा सीटों के साथ-साथ सामाजिक व भौगोलिक प्रतिनिधित्व भी बदल सकता है. ऐसे संवेदनशील समय में राज्य सरकार का स्पष्ट रुख सामने न आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार की कार्यप्रणाली भी गंभीर सवालों के घेरे में है.

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उन्होंने लिखा कि जो सरकार समय पर निकाय और पंचायत चुनाव तक संपन्न नहीं करवा पा रही, उससे इतने बड़े संवैधानिक बदलाव को प्रभावी ढंग से संभालने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? जब बुनियादी लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं ही प्रभावित हैं, तो प्रदेश का पक्ष केंद्र के सामने मजबूती से रखना भी संदिग्ध हो जाता है. दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री जी जनहित के गंभीर मुद्दों को छोड़कर केवल इवेंट्स और दिखावे तक सीमित होते जा रहे हैं. शासन चलाने के लिए स्पष्ट दृष्टि और गंभीरता की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान सरकार में कहीं नजर नहीं आ रही है.

“जूली आपको इतनी चिंता क्यों सता रही है”
टीकाराम जूली के बयान पर मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने पलटवार किया है. परिसीमन की प्रक्रिया एक संवैधानिक प्रक्रिया है और जब कानून पारित हो गया कि 2025 के बाद लोकसभा-विधानसभा का परिसीमन होगा. नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भी परिसीमन के साथ ही लागू करने का जब निर्णय ले लिया गया और लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, तो मैं समझ सकता हूं कि उसके लिए जो भी कमेटी बनेगी, जो भी वैधानिक तरीके होंगे, उन सबको समयबद्ध तरीके से अपनाया जाएगा. टीकाराम जूली आपको इतनी चिंता क्यों सता रही है?

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