Congress Rally: बाड़मेर के धोरीमन्ना में हाल ही में हुई जन आक्रोश रैली ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में मानो भूचाल ला दिया। इस रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, हेमाराम चौधरी, हरीश चौधरी और सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल शामिल हुए।
गहलोत गुट की गैर-मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
हालांकि, इस रैली से गहलोत गुट के अमीन खान और पूर्व विधायक मेवाराम जैन दूर रहे। उनकी गैर-मौजूदगी ने साफ कर दिया कि कांग्रेस के अंदरूनी समीकरण अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। इसे गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
डोटासरा-जूली की बैठक, चुनावी तैयारियों पर जोर
रैली के बाद डोटासरा और टीकाराम जूली ने सर्किट हाउस में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पंचायती राज और नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को तेज करने का संदेश दिया।
पायलट की सक्रियता, 2028 पर फोकस
वहीं, सचिन पायलट सीधे बाड़मेर पहुंचे और अपने समर्थकों से मिले। उन्होंने एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष विनोद जाखड़ और निर्मल चौधरी के साथ 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की।
सीमांकन विरोध बना रैली का मुख्य मुद्दा
दरअसल, इस जन आक्रोश रैली का मुख्य कारण बाड़मेर-बालोतरा जिला सीमांकन का विरोध था। इसी मुद्दे को लेकर वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी धरने पर बैठे थे। हेमाराम चौधरी पायलट गुट के नेता माने जाते हैं और गहलोत के विरोधी भी रहे हैं।
गहलोत के दौरे की अटकलें तेज
इन्हीं वजहों से रैली में गहलोत गुट की गैर-मौजूदगी और पायलट की सक्रियता को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह भी चर्चा है कि अशोक गहलोत खुद जल्द बाड़मेर का दौरा कर सकते हैं। कुल मिलाकर, मामला अब सिर्फ जिला सीमांकन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी की सियासी जंग में बदल चुका है।



