Ashok Gehlot phone tapping: राजस्थान में वोटर लिस्ट रिवीजन यानी SIR को लेकर बवाल मचा हुआ है. और अब यह लड़ाई सड़क से ज़्यादा सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही है.
सबसे पहले अशोक गहलोत ने खोला मोर्चा
सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर मोर्चा खोला. गहलोत ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर कांग्रेस समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 भरकर लोगों के नाम हटाने की कोशिश हो रही है और BLOs पर दबाव बनाया जा रहा है. गहलोत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं और नियम के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई होगी.
गहलोत के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार
इसके बाद बीजेपी नेता भी चुप रहने वाले नहीं थे. उन्होंने भी गहलोत के ट्वीट का जवाब दिया. सबसे पहले बीजेपी की ओर से मोर्चा संभाला पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने. राठौड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर ट्वीट कर लिखा कि पूर्व मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी को यह पता नहीं है कि SIR प्रक्रिया न तो सरकार करती है और न ही कोई राजनीतिक पार्टी. यह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा की जा रही प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए भ्रामक और झूठा प्रचार किया जा रहा है.
सुमित गोदारा का वीडियो, पुराने आरोपों की दिलाई याद
राठौड़ के बाद कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रभावित करने और विधायकों के कॉल रिकॉर्ड करवाने का काम आपने (अशोक गहलोत) किया था, जिसका आरोप आपके खुद के OSD ने लगाया था. गोदारा ने कहा कि 15 साल मुख्यमंत्री रहने के बाद भी गहलोत संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता में भ्रम फैला रहे हैं, इसी वजह से पूरे देश ने कांग्रेस को नकार दिया है.
खाचरियावास का वीडियो, SC-ST और मुस्लिम वोटरों को लेकर आरोप
बता दें कि बीते दिन यानी 15 जनवरी को कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी ‘X’ पर एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने लिखा कि यह वीडियो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बात पर मुहर लगाता है, जिसमें जयपुर में BLO पर SC, ST और मुस्लिम समाज के वोट काटने का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया गया है. खाचरियावास ने दावा किया कि SIR में लोगों को टारगेट कर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं और कारण पूछने पर झूठ बोला जा रहा है. उन्होंने इसे संविधान पर हमला बताते हुए कहा कि कांग्रेस इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी.
सरकार के दावे और बड़ा सवाल
अब बीजेपी सरकार इन आरोपों को पूरी तरह नकार रही है. कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और सरकार का इसमें कोई रोल नहीं है. लेकिन सवाल सीधा है, अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो फिर वोट कटने की शिकायतें लगातार क्यों आ रही हैं? अंतिम तारीख बढ़ी, अब गेंद सरकार और आयोग के पाले में अब जब चुनाव आयोग ने आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तारीख 19 जनवरी तक बढ़ा दी है, तो गेंद सरकार और चुनाव आयोग, दोनों के पाले में है. फिलहाल राजस्थान में माहौल गरम है और यह मामला अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे तौर पर लोकतंत्र और वोट के अधिकार से जुड़ चुका है.



