Farmer’s Crop : राजस्थान में मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि सितंबर महीने में ही राजस्थान के मूंग उत्पादक किसानों को 221 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
1 सितंबर से मूंग खरीद शुरू करने की लंबे समय से मांग
रामपाल जाट ने पत्र में बताया कि राजस्थान की मंडियों में मूंग की आवक 1 सितंबर से पहले ही शुरू हो जाती है। पिछले कई वर्षों से किसान संगठन लगातार 1 सितंबर से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्रालय को कई बार लिखित और मौखिक रूप से आग्रह भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि खरीद में देरी के कारण किसानों को अपनी उपज बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है।
MSP से कम दाम पर मूंग बेचने को मजबूर किसान
रामपाल जाट के अनुसार मूंग का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन बाजार में किसानों को इससे काफी कम कीमत मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि कई किसानों को प्रति क्विंटल 3,000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा है। पत्र में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर महीने में राजस्थान की मंडियों में 7 लाख 70 हजार 481 क्विंटल मूंग की आवक हुई। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल कम दामों पर बेचनी पड़ी।
राजस्थान के किसानों को 221 करोड़ रुपये से ज्यादा नुकसान का दावा
किसान महापंचायत अध्यक्ष ने सितंबर महीने की मूंग आवक के आधार पर अनुमान जताया कि राजस्थान के किसानों को 221 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हो चुका है। रामपाल जाट ने कहा कि सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किए जाने के बावजूद किसानों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार किसानों को MSP से कम कीमत पर उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होने देने की बात करती है, तो खरीद में देरी के कारण किसानों को नुकसान क्यों उठाना पड़ रहा है।
मूंग के साथ तिलहन और बाजरा किसानों की भी समस्या
रामपाल जाट ने पत्र में कहा कि केवल मूंग ही नहीं, बल्कि तिलहन, अन्य दलहन और बाजरा जैसी फसलों के उत्पादक किसान भी कम बाजार भाव की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुनिश्चितता के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग
किसान महापंचायत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होने से पहले जिन किसानों ने अपनी उपज कम कीमत पर बेची है, उन्हें संबंधित योजना के तहत हुए नुकसान की भरपाई की जाए। रामपाल जाट ने कहा कि खरीद में देरी का आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। इसके लिए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर मूंग सहित अन्य फसलों की MSP पर खरीद शुरू करनी चाहिए।
2030-31 तक मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग
रामपाल जाट ने दलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030-31 तक अरहर, मसूर, उड़द और चना की तरह मूंग की भी शत-प्रतिशत सरकारी खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) के माध्यम से मूंग की खरीद की व्यवस्था करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि इससे अलग-अलग दलहन फसलों की सरकारी खरीद में भेदभाव की स्थिति समाप्त होगी और मूंग उत्पादक किसानों को भी समान लाभ मिल सकेगा।
केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
किसान महापंचायत अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद तत्काल शुरू की जाए। साथ ही खरीद शुरू होने से पहले किसानों को हुए नुकसान की भरपाई और तिलहन सहित अन्य फसलों के लिए प्रभावी मूल्य समर्थन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसान महापंचायत का कहना है कि समय पर सरकारी खरीद और उचित मूल्य मिलने से ही किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है।
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