Kissan Mahapanchayat :ग्राम कोडियाई में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की अध्यक्षता में विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। बैठक में ईसरदा बांध से भरतपुर जिले के बंधबारेठा तक पानी पहुंचाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। किसानों ने खुली नहर के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाने का विकल्प अपनाने की मांग करते हुए सर्वसम्मति से ज्ञापन तैयार किया।
गंभीर नदी के जरिए पानी पहुंचाने का सुझाव
महापंचायत में किसानों ने पाइपलाइन के विकल्प के साथ ईसरदा बांध का पानी गंभीर नदी के माध्यम से पहुंचाने का सुझाव भी रखा। किसानों का कहना था कि इससे कृषि भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता कम हो सकती है और प्रभावित किसान परिवारों के सामने आने वाली समस्याओं को भी सीमित किया जा सकता है।
27 सितंबर को सुंदरी गांव में अगली महापंचायत
बैठक में किसान महापंचायत की श्रृंखला शुरू करने पर भी सहमति बनी। अगली किसान महापंचायत 27 सितंबर को सुंदरी गांव में आयोजित करने की घोषणा की गई। इस दौरान अलग-अलग गांवों के किसानों को अभियान से जोड़ने और अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
‘बाजार मूल्य को DLC मानने की व्यवस्था किसानों के साथ धोखा’
महापंचायत को संबोधित करते हुए रामपाल जाट ने भूमि के प्रतिकर से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए। उन्होंने बाजार मूल्य को डीएलसी के रूप में परिभाषित करने की व्यवस्था को प्रभावित किसानों के हितों के विपरीत बताया। उनका कहना था कि खुली नहर के निर्माण के लिए कृषि भूमि लिए जाने से किसान परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बौली SDM के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन
सभा में बौली, बामनवास और गंगापुर तहसील के विभिन्न गांवों से आए पांच पटेलों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में किसानों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने पर सहमति जताई। तय किया गया कि उपखंड अधिकारी बौली के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा जाएगा।
किसानों ने बुलंद की आवाज
महापंचायत के दौरान किसानों ने खुली नहर के लिए जमीन नहीं देने की बात दोहराई और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। किसानों ने कहा कि वे अपनी कृषि भूमि और आजीविका की रक्षा के लिए संगठित होकर आंदोलन जारी रखेंगे। सभा का संचालन सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी बीरबल मीणा ने किया। कार्यक्रम में बौली, बामनवास, गंगापुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।


