Basant Panchmi : सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह शरीफ में रविवार को बसंत उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर दरगाह शरीफ के कव्वालों ने हज़रत अमीर खुसरो और हज़रत नियाज़ बे नियाज़ द्वारा रचित बसंत गीतों को राग बसंत में प्रस्तुत किया।
दरगाह के मुख्य निजाम गेट से कव्वालों ने सरसों और गुलाब के सुंदर फूलों से सजे बसंत के गुलदस्तों को लेकर बंसत गीत गाते मजार शरीफ तक पहुंचे तथा आस्ताने में ख्वाजा के मजार पर पेश किए। इस अवसर पर दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली के पुत्र सैयद नसरुद्दीन, अनेक खादिमों के साथ बडी संख्या में जायरीन ने भी बसंत कार्यक्रम में हिस्सा लिया। दरगाह कमेटी के कर्मचारियों ने व्यवस्था संभाली।
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इसलिए मनाते हैं बसंत
बसंत पेश करने की परंपरा अमीर खुसरो से शुरू हुई। सबसे पहले हजरत अमीर खुसरो ने ही अपने धार्मिक गुरु हजरत निजामुद्दीन औलिया की शान में बसंत गीत रचा और सरसों के फूलों का गुलदस्ता बनाकर पेश किया था। पिछले छह सौ सालों से बसंत चिश्तिया खानकाहों, दरगाहों पर एक त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा। दरगाहों के सज्जादानशीन, खादिम परिवारों में बसंत की खुशी में पीले कपड़े पहने जाते हैं और विशेष रूप से पीले चावल बनाए जाते हैं।
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