Moon : हिंदू धर्म में अमावस्या के बाद चंद्रमा के दर्शन करने को चंद्र दर्शन कहा जाता है. इस परंपरा को लेकर मान्यता है कि अमावस्या के अगले दिन चांद की पतली से रेखा के प्रथम दर्शन किए जाएं तो जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है. सुख-समृद्धि बढ़ती है. वहीं इस्लाम धर्म में भी अमावस के बाद दिखाई देने वाले चांद को देख कर ही पवर्, त्यौहार मनाए जाते हैं। 15 जून को अमावस्या थी और आज 16 जून 2026 को प्रथम चंद्र दर्शन होगा. इस्लामी कैलेण्डर अनुसार आज चांद रात है कल से मोहर्रम शुरु हो जाएगें। देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु चंद्र दर्शन के दिन व्रत भी रखते हैं और रात को चंद्र देव की पूजा करते हैं।
चंद्र दर्शन का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. कुंडली में चंद्रमा मजबूत हो तो व्यक्ति शांत और कोमल स्वभाव वाला होता है. उसकी निर्णय क्षमता अच्छी होती है. उसे जीवन में सुख, समृद्धि और सम्मान प्राप्त होता है. ऐसा व्यक्ति मुश्किल समय को भी हंसते-हंसते पार कर जाता है. वहीं कमजोर चंद्रमा व्यक्ति को बेहद भावुक, निराशावादी बना सकता है. ऐसे लोगों को चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए. चंद्रमा के मंत्रों का जाप करना चाहिए.
आज चंद्र दर्शन की सुबह
अमावस्या के बाद प्रतिपदा तिथि की रात को प्रथम चंद्र दर्शन किए जाते हैं. प्रोकेरला पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 15 जून की सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 16 जून की सुबह 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. वहीं 16 जून को चंद्रमा का उदय सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर और अस्त रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा. चंद्र दर्शन के लिए सूर्यास्त के बाद का समय सबसे अच्छा माना जाता है. आज सूर्यास्त शाम 07-09 बजे होगा. लिहाजा इसके बाद से 08-50 बजे तक चंद्र दर्शन हो सकेगा. हालांकि ये तभी संभव है, जब आसमान साफ हो.
व्रत का होगा पारण
जो लोग आज व्रत रखते हैं वे शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर परिवार के लिए मंगल कामना करते हैं. पूजा करते हैं और फिर व्रत का पारण करते हैं. साथ ही इस दिन चीनी, चावल, सफेद चीजों का दान करना भी शुभ फल देता है.
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