Astrology: शादी से पहले लड़के और लड़की की जन्मकुंडली मिलाने की प्रथा है। जन्मकुंडली मिलान में राशि, गण, भकूट, राशि स्वामी का मुख्यतय दोनों कुंडली में मिलान किया जाता है। इस मिलान को वैवाहिक जीवन की सफलता, मानसिक सामंजस्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कुंडली मिलान की सबसे प्रचलित पद्धति अष्टकूट मिलान है, जिसमें वर और वधू की जन्म कुंडलियों के आधार पर गुणों का मिलान किया जाता है। अष्टकूट मिलान का वैवाहिक जीवन पर क्या प्रभाव होता है, जानिए
क्या है अष्टकूट मिलान?
ज्योतिष शास्त्र में विवाह से पहले वर और वधू की जन्म कुंडली का मिलान अष्टकूट प्रणाली से किया जाता है। अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं। वहीं अगर मिलान में 18.5 गुण आ जाते हैं। तो मिलान सही मान जाता है। साथ ही 28 से अधिक गुण मिलना अत्यंत उत्तम समझा जाता है। अष्टकूट मिलान को इस प्रकार बांटा गया है आइए जानते हैं –
वर्ण कूट (1 गुण) दृ आध्यात्मिक और सामाजिक सामंजस्य
वश्य कूट (2 गुण) दृ आपसी आकर्षण और नियंत्रण
तारा कूट (3 गुण) दृ स्वास्थ्य और भाग्य
योनि कूट (4 गुण) दृ शारीरिक और मानसिक अनुकूलता
ग्रह मैत्री (5 गुण) दृ मानसिक तालमेल
गण कूट (6 गुण) दृ स्वभाव और व्यवहार
भकूट (7 गुण) दृ आर्थिक स्थिति और पारिवारिक सुख
नाड़ी कूट (8 गुण) दृ संतान सुख और स्वास्थ्य
शादी में मुख्यतय भकूट, नाड़ी और ग्रहमैत्री दोष देखा जाता है।
क्या है होता भकूट?
वैदिक ज्योतिष में भकूट का संबंध वर और वधू की चंद्र राशि के आपसी संबंध से होता है। अष्टकूट मिलान में इसे 7 अंक दिए जाते हैं। यदि वर- वधू की राशियाँ 2-12, 5-9 या 6-8 संबंध में हों, तो भकूट दोष माना जाता है।
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भकूट दोष का प्रभाव
कुंडली में भकूट दोष से से दांपत्य जीवन में तनाव रहता है। साथ ही वर- वधू को आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। साथ ही विचारों में मतभेद रहते है। वहीं संतान सुख में बाधा का सामना करना पड़ता है।
क्या होता है नाड़ी दोष?
कुंडली में नाड़ी दोष का संबंध स्वास्थ्य और संतति से जुड़ा माना जाता है। अष्टकूट मिलान में इसे सर्वाधिक 8 अंक दिए गए हैं। आपको बता दें कि नाड़ी तीन प्रकार की होती हैरू 1- आदि 2-मध्य 3-अन्त्य। आपको बता दें कि यदि वर और वधू की नाड़ी समान हो, तो नाड़ी दोष बनता है।
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