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राजस्थान कांग्रेस में ‘क्रेडिट वॉर’? गहलोत बनाम डोटासरा की सियासी खींचतान पर उठे सवाल

Rajasthan Congress news
  • राजनीतिक विश्लेषण मुकेश मिश्रा

Rajasthan Congress : राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक ब्रांडिंग को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। एक तरफ तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत हैं, जिनकी प्रदेश की राजनीति में मजबूत और लंबी पहचान है। दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा हैं, जो संगठन पर अपनी पकड़ और लगातार सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी के जरिए पार्टी के प्रमुख शक्ति केंद्र के रूप में उभरे हैं। इसी बीच कई हालिया घटनाक्रमों ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजस्थान कांग्रेस के भीतर अब ‘क्रेडिट वॉर’ शुरू हो चुकी है? क्या हर बड़ा आंदोलन, प्रदर्शन और राजनीतिक मुद्दा पार्टी के अलग-अलग नेताओं के लिए अपनी ताकत दिखाने और राजनीतिक श्रेय लेने का मंच बनता जा रहा है?

मालवीया समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन से शुरू हुई नई बहस

कांग्रेस में ताजा राजनीतिक चर्चा उस समय तेज हुई जब महेंद्रजीत सिंह मालवीया के समर्थकों ने अशोक गहलोत के आवास पर शक्ति प्रदर्शन किया और ‘चौथी बार गहलोत सरकार’ जैसे नारे लगाए। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा पैदा कर दी। डोटासरा ने बिना किसी नेता का नाम लिए संगठन को सर्वोपरि बताते हुए संदेश दिया कि कांग्रेस में व्यक्तिगत ब्रांडिंग से अधिक महत्व संगठन का है और पार्टी की अनुमति के बिना होने वाले कार्यक्रम स्वीकार्य नहीं हैं। दूसरी ओर अशोक गहलोत ने किसी तरह की नाराजगी या विवाद से इनकार किया और कहा कि इस मामले को बेवजह बढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद यह घटनाक्रम सवाल छोड़ गया कि क्या कांग्रेस के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर अलग-अलग शक्ति केंद्र अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं?

क्या सिर्फ नारों का विवाद या भविष्य के नेतृत्व का संकेत?

राजनीतिक नजरिए से देखें तो मामला केवल समर्थकों द्वारा लगाए गए नारों तक सीमित नहीं माना जा रहा। अशोक गहलोत की सक्रियता और उनके समर्थकों की ओर से लगातार उन्हें बड़े चेहरे के रूप में पेश किए जाने के बीच डोटासरा का संगठन को सबसे ऊपर रखने वाला संदेश राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि इसे राजस्थान कांग्रेस के भीतर प्रभाव और नेतृत्व की बदलती तस्वीर से जोड़कर देखा जा रहा है।

शुभम रेवाड़ के अनशन में दिखी ‘श्रेय की राजनीति’?

राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र नेता शुभम रेवाड़ के अनशन के दौरान भी कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने कांग्रेस के भीतर राजनीतिक श्रेय की चर्चा को हवा दी। अनशन खत्म कराने को लेकर अलग-अलग नेताओं की मौजूदगी और जूस-पानी पिलाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनीं। इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर अनशन खत्म कराने का श्रेय किसे मिलना चाहिए। राजनीतिक स्तर पर इस घटनाक्रम को भी गहलोत और डोटासरा खेमों की सक्रियता से जोड़कर देखा गया। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि कांग्रेस के भीतर अब किसी भी जनआंदोलन पर राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की होड़ बढ़ रही है।

मूक-बधिर स्कूल आंदोलन में भी अलग-अलग सक्रियता

जयपुर के सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक-बधिर स्कूल में दिव्यांग बच्चों के आंदोलन के दौरान भी अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की अलग-अलग सक्रियता देखने को मिली। दोनों नेताओं ने आंदोलन से जुड़े मुद्दे उठाए और सरकार पर सवाल किए, लेकिन अलग-अलग कार्यक्रमों और बयानों के जरिए अपनी राजनीतिक भूमिका भी दर्ज कराई। अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कामों का जिक्र करते हुए सरकार को घेरा, जबकि डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस संगठन की ओर से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए मुद्दे को उठाया। यहीं से सवाल फिर वही खड़ा हुआ—क्या कांग्रेस के बड़े नेता एक ही मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक स्पेस बनाने की कोशिश कर रहे हैं?

डोटासरा सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष या नया शक्ति केंद्र?

गोविंद सिंह डोटासरा लंबे समय से राजस्थान कांग्रेस की कमान संभाल रहे हैं। संगठनात्मक गतिविधियों, धरना-प्रदर्शनों और सरकार के खिलाफ अभियानों में उनकी लगातार सक्रियता ने उन्हें पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल किया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि डोटासरा अब केवल प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राजस्थान कांग्रेस में अपने स्वतंत्र राजनीतिक प्रभाव को मजबूत कर रहे हैं। यही कारण है कि उनके हर बड़े बयान और राजनीतिक कार्यक्रम को भविष्य की नेतृत्व राजनीति से जोड़कर भी देखा जाने लगा है।

गहलोत की राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत

दूसरी तरफ अशोक गहलोत राजस्थान कांग्रेस की राजनीति के सबसे अनुभवी और बड़े नेताओं में शामिल हैं। तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके गहलोत का प्रदेशभर में अपना राजनीतिक नेटवर्क और समर्थक वर्ग है। सरकार में नहीं होने के बावजूद गहलोत लगातार प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय दिखाई देते हैं। उनके समर्थक भी समय-समय पर उन्हें भविष्य की राजनीति से जोड़कर नारे और बयान देते रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस संगठन के भीतर गहलोत की राजनीतिक मौजूदगी अभी भी बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।

क्या कांग्रेस में बन चुके हैं दो पावर सेंटर?

हालिया घटनाक्रमों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्थान कांग्रेस में दो अलग-अलग शक्ति केंद्र दिखाई देने लगे हैं? एक तरफ अशोक गहलोत की व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान और उनके समर्थकों का बड़ा आधार है। दूसरी तरफ डोटासरा के पास प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत नेटवर्क है। अगर दोनों नेताओं की सक्रियता एक-दूसरे की पूरक रहती है तो यह कांग्रेस के लिए ताकत साबित हो सकती है। लेकिन यदि यही सक्रियता राजनीतिक वर्चस्व और श्रेय की प्रतिस्पर्धा में बदलती है तो पार्टी के लिए अंदरूनी चुनौती बढ़ सकती है।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा या गुटबाजी की नई शुरुआत?

फिलहाल अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा दोनों ही किसी खुले विवाद से इनकार करते दिखाई देते हैं। पार्टी की ओर से भी किसी तरह के टकराव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद राजनीतिक कार्यक्रमों, समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन और श्रेय लेने की चर्चाओं ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संतुलन को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। अब सवाल यह है कि यह केवल स्वस्थ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है या भविष्य में किसी बड़ी गुटबाजी का आधार बन सकती है।

2028 में कांग्रेस का नंबर-1 चेहरा कौन?

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं और कांग्रेस के लिए अभी लंबा राजनीतिक सफर बाकी है। ऐसे में किसी एक चेहरे को अभी से भविष्य का नेता घोषित करना जल्दबाजी होगी। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम इतना जरूर संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में राजस्थान कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मुकाबला महत्वपूर्ण रहने वाला है। क्या अशोक गहलोत अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखेंगे? क्या गोविंद सिंह डोटासरा संगठन की ताकत के सहारे कांग्रेस के सबसे बड़े प्रदेश चेहरे के रूप में उभरेंगे? या पार्टी नेतृत्व किसी तीसरे चेहरे को आगे लाएगा? फिलहाल जवाब स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजस्थान कांग्रेस में ‘क्रेडिट वॉर’ और दो शक्ति केंद्रों की चर्चा ने 2028 से पहले सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

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