Oversleeping Side Effects: अच्छी और पर्याप्त नींद स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन सवाल यह है कि कितनी नींद काफी है? ज्यादातर वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। हालांकि, हाल की रिसर्च बताती है कि मध्यम उम्र और बुजुर्गों के लिए नियमित रूप से 7 घंटे की नींद सबसे आदर्श हो सकती है। इससे ज्यादा या कम नींद लंबे समय में स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है।
7 घंटे की नींद क्यों है सबसे बेहतर?
Nature Aging जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन (यूके बायोबैंक डेटा से लगभग 5 लाख लोगों पर, उम्र 38-73 साल) में पाया गया कि जो लोग रोजाना करीब 7 घंटे सोते थे, उनकी संज्ञानात्मक क्षमता (याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और सोचने-समझने की शक्ति) बेहतर थी। उनका मूड स्थिर रहता था और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कम देखी गईं।
इसके विपरीत, बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद लेने वालों में चिंता, डिप्रेशन और संज्ञानात्मक गिरावट का खतरा बढ़ा हुआ था। अध्ययन में यह भी सामने आया कि नींद की अवधि में उतार-चढ़ाव न होना (नियमितता) भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन और स्लीप रिसर्च सोसाइटी की सिफारिश है कि वयस्कों को इष्टतम स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे कम नींद से हृदय रोग, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, कमजोर इम्यूनिटी और डिप्रेशन का जोखिम बढ़ जाता है।
क्या 9 घंटे से ज्यादा सोना हानिकारक है?
बीमारी या अत्यधिक थकान के बाद कभी-कभी ज्यादा सोना ठीक है, लेकिन अगर रोजाना 9 घंटे या इससे अधिक नींद की जरूरत पड़ रही है, तो यह किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है (Oversleeping Side Effects) । कई अध्ययनों में पाया गया है कि लंबे समय तक ज्यादा नींद लेने वालों में:
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शरीर में सूजन बढ़ना
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सोचने की गति धीमी होना
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डिप्रेशन का खतरा
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हृदय रोग, डायबिटीज और मोटापा
का जोखिम बढ़ जाता है। कुछ मेटा-एनालिसिस में लंबी नींद (9 घंटे से ज्यादा) वाले लोगों में सभी कारणों से मृत्यु का जोखिम 20-30% तक अधिक पाया गया। हालांकि, यह सीधा कारण-प्रभाव नहीं है – ज्यादा नींद अक्सर छिपी बीमारियों (Oversleeping Side Effects)जैसे डिप्रेशन या थायरॉइड समस्या का लक्षण होती है।
अगर 9 घंटे सोने के बाद भी थकान महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से जांच करवाएं – यह नींद की खराब क्वालिटी या किसी बीमारी की वजह से हो सकता है।
कम नींद के नुकसान क्या हैं?
रोजाना 5-6 घंटे या इससे कम सोने वालों में प्रभाव धीरे-धीरे दिखते हैं:
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याददाश्त कमजोर होना
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ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत
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मूड स्विंग्स
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इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ना
लंबे समय में मेटाबॉलिक बीमारियां, हृदय समस्याएं और मोटापा का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग वीकेंड पर ज्यादा सोकर नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन रिसर्च दिखाती है कि अनियमित नींद भी खतरनाक है। सोने-जागने का समय रोज बदलने से शरीर की आंतरिक घड़ी (सर्कैडियन रिदम) बिगड़ जाती है, जिससे लिवर, हृदय रोग, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जोखिम 25% तक बढ़ सकता है। हाल की स्टडीज में नींद की नियमितता को मृत्यु जोखिम का सबसे मजबूत पूर्वानुमान बताया गया है – अवधि से भी ज्यादा महत्वपूर्ण
नींद में सबसे जरूरी है नियमितता
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि नींद की मात्रा जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही उसकी गुणवत्ता और नियमितता। रोज एक ही समय पर सोना और जागना शरीर को संतुलित रखता है, मूड, इम्यूनिटी और समग्र स्वास्थ्य बेहतर बनाता है।
वर्तमान सबूतों के आधार पर, बिना रुकावट की नियमित 7 घंटे की अच्छी नींद दिमागी तेजी, मानसिक स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए सबसे फायदेमंद है। अगर आपकी नींद अनियमित है या ज्यादा/कम लग रही है, तो जीवनशैली में बदलाव लाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। स्वस्थ नींद स्वस्थ जीवन की कुंजी है!



