Health- बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कम होना या दिमाग का पहले जैसा तेज़ न रहना एक आम समस्या है। लेकिन क्या खानपान में थोड़ा बदलाव करके इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है? हाल ही में आई एक नई वैज्ञानिक रिसर्च इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करती है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के चोबानियन एंड अवेडिसियन स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक चली एक स्टडी में पाया कि जो लोग सालों तक अपनी डाइट में थोड़ी कैलोरी कम लेते हैं, उनके दिमाग के बूढ़े होने की रफ्तार धीमी हो सकती है।
दिमाग पर उम्र का असर कैसे पड़ता है?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे दिमाग की कोशिकाएं यानी न्यूरॉन्स धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा नसों के आसपास मौजूद मायलिन शीथ नाम की सुरक्षात्मक परत भी पतली होने लगती है। जब यह परत कमजोर होती है तो दिमाग के व्हाइट मैटर की गुणवत्ता कम होने लगती है। इसका असर हमारी याददाश्त, सोचने की क्षमता और नई चीजें सीखने की गति पर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, उम्र बढ़ने के साथ दिमाग की इम्यून कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं, जिससे सूजन बढ़ने लगती है। कई वैज्ञानिक मानते हैं कि यही प्रक्रिया आगे चलकर अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ सकती है।
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रिसर्च में क्या पता चला?
यह अध्ययन कई सालों तक चला। इसमें दो अलग-अलग समूहों को ट्रैक किया गया। एक समूह सामान्य संतुलित आहार लेता रहा, जबकि दूसरे समूह के लोगों ने अपनी रोज़ की कैलोरी लगभग 30 प्रतिशत कम रखी। वैज्ञानिकों ने दोनों समूहों का लंबे समय तक अध्ययन किया। बाद में मृत्यु के बाद उनके दिमाग का भी वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया। इसके लिए सिंगल-न्यूक्लियस RNA सीक्वेंस नाम की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे दिमाग की कोशिकाओं के अंदर जीन की गतिविधि को समझा जा सकता है।
कम कैलोरी लेने वालों में क्या बदलाव दिखे?
रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों ने लंबे समय तक कैलोरी कम ली थी, उनके दिमाग की कोशिकाएं ज्यादा स्वस्थ दिखाई दीं। इन लोगों में मेटाबॉलिज्म बेहतर था और मायलिन से जुड़े जीन ज्यादा सक्रिय पाए गए। इसके अलावा ऊर्जा बनाने से जुड़े कई जैविक प्रोसेस भी बेहतर काम कर रहे थे। मुख्य शोधकर्ता एना विटानटोनियो के अनुसार यह दुर्लभ और लंबे समय तक चला अध्ययन है जो दिखाता है कि कैलोरी में नियंत्रित कमी जटिल जीवों में भी दिमाग के बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है।
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क्या हर किसी को कम खाना शुरू कर देना चाहिए?
हालांकि रिसर्च के नतीजे दिलचस्प हैं, लेकिन विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बिना सलाह के अचानक बहुत कम खाना शुरू करना सही नहीं है। हर व्यक्ति की शरीर की जरूरत अलग होती है। इसलिए अगर कोई कैलोरी कम करने की सोच रहा है तो उसे डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सही तरीके से और संतुलित मात्रा में कैलोरी कम करना ही शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।



