Fashion & Life style: जॉर्डन की क्वीन रानिया अल अब्दुल्ला का व्यक्तित्व पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है. 1970 में कुवैत में जन्मी रानिया 1999 में जॉर्डन की रानी बनीं. किंग अब्दुल्ला द्वितीय की पत्नी होने के साथ-साथ उन्होंने अपनी एक अलग और सशक्त पहचान बनाई है, जो उन्हें केवल एक शाही हस्ती से कहीं ऊपर ले जाती है. हाल ही में उनके भारत दौरे के दौरान उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला, जो पावर ड्रेसिंग का बेहतरीन उदाहरण था. फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि क्वीन रानिया का स्टाइल दिखावे या चमक-धमक पर नहीं, बल्कि कपड़ों की सटीकता और सलीके पर आधारित रहता है. उन्होंने बहुत ही कुशलता से वैश्विक लक्जरी ब्रांडों के साथ भारतीय विरासत का तालमेल बिठाया.
सादगी और कला का मेल
मुंबई दौरे के दौरान उन्होंने भारतीय शिल्प कौशल के प्रति अपना सम्मान जाहिर किया. वहां एक स्कूल की यात्रा के लिए उन्होंने भारतीय लेबल ज्पसइल।ट का हाथ से कढ़ाई किया हुआ एक सुंदर ब्लेज़र चुना. इसे उन्होंने साधारण सफेद ट्राउजर के साथ पहनकर यह दिखाया कि सादगी और कला का मेल कितना प्रभावशाली हो सकता है. वहीं दिल्ली में आयोजित एक समिट में उनका अंदाज कूटनीतिक और मिलनसार दिखा. उन्होंने रोजेटा गेट्टी का हल्के गुलाबी रंग का टॉप और फेन्डी की पोल्का डॉट वाली स्कर्ट पहनी थी. विशेषज्ञों के अनुसार, उन्होंने जानबूझकर इन सॉफ्ट कलर्स का चुनाव किया ताकि वे लोगों के साथ आसानी से एक सहज जुड़ाव बना सकें.
सरल व्यक्तित्व को दर्शाता पहनावा
फैशन स्टाइलिस्ट पायल शिंगवी और पलक शाह ने उनके इस चुनाव को बेहद रणनीतिक बताया है. उनके अनुसार, रानी द्वारा चुने गए ढीले-ढाले और कोमल सिलुएट्स मानवीय जुड़ाव के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे. यह उनके व्यक्तित्व के उस पहलू को दर्शाता है जहां वह एक रानी होकर भी जनता के बीच सुलभ और सरल दिखना चाहती थीं. उनके पर्सनल स्टाइल में अप्रोचेबिलिटी यानी लोगों के करीब दिखने का भाव प्रमुख रहता है. फैशन विशेषज्ञों के अनुसार, वे अक्सर हल्के रंगों (सॉफ्ट कलर्स) और ढीले-ढाले सिलुएट्स का चुनाव करती हैं, जो उन्हें एक सरल व्यक्तित्व के रूप में प्रदर्शित करता है. रानी रानिया अपने लुक को सिंपल और क्लासिक रखने के लिए मिनिमल एक्सेसरीज जैसे क्लच बैग या छोटे ईयररिंग्स के साथ पूरा करती हैं. जो उनके लुक को प्रभावशाली बनाते हैं.
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वैश्विक स्तर पर रानिया की छवि
क्वीन रानिया आज वैश्विक स्तर पर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और मानवीय कार्यों के लिए एक मजबूत आवाज बन चुकी हैं. उनके इन्हीं प्रयासों और समर्पण के कारण 2007 में यूनिसेफ ने उन्हें बच्चों के लिए पहली एमिनेंट एडवोकेट के रूप में नामित किया था. वह वर्तमान में शरणार्थी अधिकारों और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं
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