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Earwax : रोज कान की सफाई से फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

Earwax and Health

Earwax: कान का मैल हमारे कान से निकलने वाला एक नेचुरल रिसाव है, लोगों को लगता है कि जैसे शरीर के हर अंग की सफाई जरूरी है, वैसे ही कान की भी सफाई जरूरी है. इसलिए कई लोग जिस तरह स्किनकेयर, बाल धोने या नाखून काटने का काम करते हैं, वैसे ही कान का मैल भी निकालते रहते हैं. कुछ लोग इसे हफ्ते में एक बार साफ करते हैं, तो कुछ रोजाना. कुछ लोग कान में तेल डालते हैं, कुछ क्यू-टिप्स या नए ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं.

क्या Earwax हानिकारक है?

Earwax गंदगी नहीं है, बल्कि यह शरीर का नेचुरल क्लीनर है. इसका काम धूल, बैक्टीरिया और अन्य कणों को रोकना है ताकि वे हमारे नाजुक कान के अंदर न पहुंचें. ज्यादातर मामलों में Earwax अपने आप ही कान से बाहर निकल जाता है, जब हम चबाते हैं या बात करते हैं. इसलिए कई लोगों को अपने कानों को साफ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

कब Earwax समस्या बन सकता है?

हालांकि, कभी-कभी कान में Earwax जमा हो जाता है और इसे डॉक्टर ’इम्पैक्शन’ कहते हैं. ऐसा होने पर व्यक्ति को कान में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है, कान में घंटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है, सुनने की क्षमता घट सकती है, चक्कर आ सकते हैं, खांसी हो सकती है या कान से बदबू भी आ सकती है. ज्यादातर मामलों में यह समस्या उन लोगों में होती है जो हियरिंग एड या इयरप्लग का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं, बुजुर्ग या जिनके कान की नली का आकार ऐसा होता है कि वैक्स खुद बाहर नहीं आ पाता.

रिसर्च क्या कहती है?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओटोलरींगोलॉजी, हेड एंड नेक सर्जरी फाउंडेशन के अनुसार, कान में कॉटन स्वाब का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए. कान खुद ही साफ हो जाता है इसे रूटीन से साफ करने की जरूरत नहीं है. कॉटन स्वाब डालने से वैक्स अंदर जा सकता है, कान पर दबाव पड़ सकता है, सुनने की क्षमता कम हो सकता है या कान और ईयरड्रम को चोट पहुंच सकता है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग भी बताता है कि ईयरवैक्स खराब हाइजीन का संकेत नहीं है, बल्कि यह कान के लिए बेहद जरूरी है. यह कान के अंदर की त्वचा को मॉइस्चराइज करता है, धूल और गंदगी को रोकता है, डेड स्किन और अन्य कणों को अब्जॉर्ब करता है और बैक्टीरिया या अन्य जीवाणुओं को अंदर पहुंचने से रोकता है. वहीं, अगर ईयरवैक्स ज्यादा जमा हो जाए और इसके कारण परेशानी होने लगे तो इसे ’सेरुमेनोसिस’ कहा जाता है. डॉक्टर इस स्थिति में ओवर-द-काउंटर ड्रॉप्स, हल्की पानी से धोने की तकनीक या पेशेवर हेल्थकेयर से इसे हटवाने की सलाह देते हैं.

लोग कान साफ क्यों करते हैं?

रिसर्च से पता चलता है कि लोग अक्सर अपने कान खुद साफ करते हैं. 2017 में क्वाजुलु-नताल यूनिवर्सिटी में एक स्टडी की गई, जिसमें अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट के कान खुद साफ करने की आदत और इससे होने वाले नुकसान को देखा गया. 206 लोगों में से 98 % लोग अपने कान खुद साफ करते थे और 75 % ने माना कि यह फायदेमंद है. कान खुद साफ करने वालों में से लगभग 79.6 % कॉटन बड्स का इस्तेमाल किया था. लेकिन इससे 2.4 %  लोगों को चोट लगने का खतरा भी था. लेकिन, खुद से कान साफ करने से चोट लगने का जोखिम ज्यादा बढ़ सकता है. ऐसे में लोगों को इस बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है.

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