एंटीबायोटिक- ज़रूरत से ज़्यादा या गलत तरीके से ली गई दवा आपके पेट की सेहत बिगाड़ सकती है। यह अच्छे बैक्टीरिया को भी खत्म कर देती है, जिससे गैस, दस्त और कमजोरी हो सकती है। डॉक्टर की सलाह से ही एंटीबायोटिक लें और कोर्स पूरा करें।
बिना सलाह ली एंटीबायोटिक, तो फायदा नहीं—नुकसान तय
सर्दी-ज़ुकाम हुआ, बुखार आया और आपने तुरंत मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक ले ली? यही जल्दबाज़ी आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। हर बुखार बैक्टीरिया की वजह से नहीं होता। कई बार बीमारी वायरस से होती है, जैसे Influenza virus, जिस पर एंटीबायोटिक बिल्कुल असर नहीं करती। ऐसे में दवा लेने के बाद भी आराम नहीं मिलता, बल्कि शरीर के अंदर एक और समस्या जन्म लेने लगती है—पेट की गड़बड़ी। यानी इलाज गलत,
गट फ्लोरा: आपके शरीर की अदृश्य सुरक्षा ढालऔर नुकसान दोगुना।
हमारी आंतों में करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें गट फ्लोरा कहा जाता है। यही शरीर को कई खतरनाक बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं, जैसे Gastroenteritis, Typhoid और Septicemia। लेकिन जब हम बिना ज़रूरत एंटीबायोटिक लेते हैं, तो ये दवाएं अच्छे और बुरे दोनों तरह के बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं। नतीजा—पेट दर्द, ऐंठन, गैस, उल्टी और दस्त। धीरे-धीरे इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ने लगती है। जिस दवा को हम सुरक्षा समझते हैं, वही हमारी प्राकृतिक ढाल को तोड़ देती है।
एंटीबायोटिक का ज़्यादा इस्तेमाल बना सकता है बैक्टीरिया को ‘जिद्दी’
बार-बार और बिना ज़रूरत एंटीबायोटिक लेने से एक और बड़ा खतरा पैदा होता है—एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंस। इसका मतलब है कि बैक्टीरिया दवा के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं। फिर वही दवा भविष्य में असर नहीं करती। छोटी-सी इंफेक्शन भी बड़ी समस्या बन सकती है, क्योंकि सामान्य दवाएं काम करना बंद कर देती हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता है। अगर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल समझदारी से नहीं किया गया, तो आने वाले समय में साधारण संक्रमण का इलाज भी मुश्किल हो सकता है।
एंटीबायोटिक कब और कैसे लें? फैसला डॉक्टर पर छोड़ें
एंटीबायोटिक उतने ही दिन लें, जितने दिन डॉक्टर ने बताए हों। कम समय लेने से बैक्टीरिया रेज़िस्टेंट बन सकते हैं और ज्यादा समय तक लेने से साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं। कुछ दवाएं खाने के बाद ली जाती हैं ताकि पेट पर कम असर पड़े, जबकि कुछ—जैसे Tuberculosis के इलाज में दी जाने वाली दवाएं—खाली पेट ज़्यादा असर करती हैं। इसलिए खुद से दवा शुरू करना या बीच में छोड़ देना दोनों ही खतरनाक हो सकता है। हर एंटीबायोटिक की खुराक, समय और तरीका अलग होता है।
एंटासिड और प्रोबायोटिक की भूमिका भी समझिए
कई बार डॉक्टर एंटीबायोटिक के साथ एंटासिड या प्रोबायोटिक लेने की सलाह देते हैं। एंटासिड पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को नियंत्रित करते हैं, जिससे जलन और गैस्ट्राइटिस का खतरा कम होता है। वहीं प्रोबायोटिक अच्छे बैक्टीरिया को दोबारा संतुलित करने में मदद करते हैं, ताकि गट फ्लोरा जल्दी रिकवर हो सके। लेकिन इन्हें भी डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए, क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है।
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दवा के साथ खानपान भी ज़रूरी
जब तक एंटीबायोटिक चल रही हो, पेट को आराम देना बेहद जरूरी है। सादा खाना खाएं—दाल-चावल, खिचड़ी, हल्की सब्ज़ी। तला-भुना, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड से बचें, क्योंकि ये पेट की अंदरूनी परत में सूजन बढ़ा सकते हैं। खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। याद रखिए, एंटीबायोटिक कोई मामूली गोली नहीं है। इसका गलत इस्तेमाल आपकी आंतों, आपकी इम्यूनिटी और भविष्य के इलाज—तीनों को खतरे में डाल सकता है। इसलिए दवा वही लें, जब सच में ज़रूरत हो, और हमेशा डॉक्टर की सलाह से।
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