Actress Saadhna : हिंदी सिनेमा के इतिहास में 60 और 70 के दशक में बेहद लोकप्रिय अभिनेत्री साधना ने अपनी खूबसूरती, अभिनय और स्टाइल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उस दौर में उनकी फिल्में हिट होती थीं और उनका हेयरस्टाइल पूरे देश में ट्रेंड करता था, हालांकि जिंदगी के आखिरी दौर में उन्हें बीमारी, आर्थिक तंगी और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। आज साधना का जन्म दिन है।
लव इन शिमला ने बदली किस्मत
साधना को खास पहचान 1960 में आई फिल्म लव इन शिमला से मिली थी। आर.के. नय्यर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में वह जॉय मुखर्जी के साथ लीड रोल में थीं। फिल्म सफल रही और साधना रातोंरात स्टार बन गईं।
साधना कट हेयरस्टाइल
फिल्म में उनका फ्रिंज हेयरस्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि आगे चलकर इसे साधना कट के नाम से जाना गया। ऑड्री हेपबर्न से प्रेरित इस लुक को आम महिलाओं ने भी खूब अपनाया। चूड़ीदार सलवार सूट के चलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी साधना को दिया जाता है। इसके बाद साधना ने परख, हम दोनों, मन-मौजी, एक मुसाफिर एक हसीना, मेरे महबूब और इंतकाम जैसी फिल्मों में काम किया। 1960 के दशक में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें 11 फिल्में हिट थीं और इस तरह वह हिंदी सिनेमा की बड़ी स्टार बन गईं।
कराची में जन्मी मुंबई आकर बसा परिवार
साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को ब्रिटिश इंडिया के कराची में एक सिंधी परिवार में हुआ था। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आकर मुंबई में बस गया। बचपन से ही साधना अभिनेत्री बनना चाहती थीं। करीब 14 साल की उम्र में उन्हें राज कपूर की फिल्म श्री 420 में काम करने का मौका मिला, जहां वह गाने मुड़ मुड़ के में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर नजर आई थीं।
पहली सिंधी फिल्म से सफर शुरू हुआ
साधना का एक्टिंग करियर फिल्म अबाना से शुरू हुआ। जो भारत की पहली सिंधी फिल्म थी। यह फिल्म 1958 में रिलीज हुई थी। बताया जाता है कि इस फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 1 रुपए की फीस मिली थी। यही छोटी सी फीस आगे चलकर उनके बड़े फिल्मी सफर की शुरुआत बनी।
निर्देशक से हुआ प्यार, 1966 में शादी
लव इन शिमला के सेट पर साधना को डायरेक्टर आर.के. नय्यर से प्यार हो गया। दोनों ने 1966 में शादी कर ली। शादी के बाद भी साधना ने फिल्मों में काम जारी रखा। हालांकि बाद के वर्षों में उनकी जिंदगी मुश्किलों से घिरने लगी। 1960 के दशक के आखिर में साधना हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या से जूझने लगीं। इलाज के कारण उन्हें फिल्मों से दूरी बनानी पड़ी और कई बड़े प्रोजेक्ट उनके हाथ से निकल गए। बाद में उन्होंने इंतकाम और एक फूल दो माली जैसी फिल्मों से वापसी की, लेकिन 1970 के दशक में उनके फिल्मी ऑफर कम होते गए।
उन्होंने 1974 में गीता मेरा नाम से निर्देशन में भी हाथ आजमाया। धीरे-धीरे वह फिल्मों और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गईं।
पति की मौत के बाद बढ़ा अकेलापन
1995 में आर.के. नय्यर का निधन हो गया। दोनों की कोई संतान नहीं थी। पति के जाने के बाद साधना काफी अकेली पड़ गईं। उनकी सेहत भी लगातार खराब होती रही। आंखों की समस्या और थायरॉयड जैसी परेशानियों के कारण उनका घर से बाहर निकलना कम हो गया। उनके आखिरी साल कानूनी विवादों से भी घिरे रहे।
तीन कानूनी विवाद से रही परेशान
साधना से जुड़े तीन मामले सामने आए। इनमें एक मामला उनके सांता क्रूज स्थित बिल्डिंग के मकान मालिक यूसुफ लकड़ावाला ने किया था। एक मामला साधना ने उन्हीं के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए दर्ज कराया था। इसके बाद विवाद से जुड़ा मानहानि का मामला भी सामने आया। उस समय साधना आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रही थीं। उनके लिए इलाज और कानूनी खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने मदद की अपील भी की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहारा नहीं मिला।
समकालीन अभिनेत्रियों का मिला सहारा
बाद के समय में वहीदा रहमान, नंदा, आशा पारेख और हेलन जैसी उनकी समकालीन अभिनेत्रियां उनके करीब रहीं और उन्हें इमोशनली सहारा देती थीं। इसके बावजूद साधना का आखिरी दौर काफी अकेलेपन में बीता। 25 दिसंबर 2015 को मुंबई के एक अस्पताल में बीमारी के बाद साधना का निधन हो गया।



