टीवी इतिहास के सबसे यादगार चेहरों में से एक अरुण गोविल आज अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं। रामानंद सागर की रामायण में भगवान श्रीराम का किरदार निभाकर उन्होंने जो पहचान बनाई, वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। दशकों बीत जाने के बाद भी अरुण गोविल को लोग आज भी “टीवी का राम” कहकर ही याद करते हैं।
इस खास मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं, जिसने न सिर्फ उनकी सोच बदली बल्कि एक बुरी आदत भी छुड़वा दी।
फिल्मों से शुरू हुआ था सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि अरुण गोविल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्मों से की थी। 12 जनवरी 1958 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्मे अरुण गोविल ने 1977 में अपनी पहली फिल्म से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे पहचान बनाई।
रामायण ने बदल दी जिंदगी
1988 में जब रामायण टीवी पर आई, तो अरुण गोविल घर-घर में भगवान राम के रूप में पूजे जाने लगे। उनकी छवि इतनी गहरी हो गई कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी उसी नजर से देखने लगे। जहां भी वे जाते, फैंस उनका सम्मान करते, चरण स्पर्श करते और भगवान की तरह आदर देते थे।
फैन की नाराजगी और बड़ा फैसला
इसी दौर का एक दिलचस्प किस्सा है, जब एक फैन की सख्त डांट ने अरुण गोविल को सिगरेट जैसी आदत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। एक शूटिंग के दौरान जब वे सिगरेट पी रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें देख लिया। उस फैन ने नाराज होकर कहा कि लोग उन्हें भगवान मानते हैं और ऐसी आदतें उनकी छवि को ठेस पहुंचाती हैं।
इस एक घटना ने अरुण गोविल को अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने महसूस किया कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। इसके बाद उन्होंने सिगरेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
आज भी कायम है सम्मान
आज अरुण गोविल सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और जिम्मेदारी की मिसाल माने जाते हैं। अभिनय के साथ-साथ वे सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय हैं और समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं।
उनका यह किस्सा साबित करता है कि कभी-कभी एक आम इंसान की बात भी जिंदगी बदलने का कारण बन सकती है।
ये भी पढ़ें- हाथों में डमरू लेकर शौर्य यात्रा में शामिल हुए PM मोदी, बोले- एक ओर स्वयं महादेव दूसरी ओर…



