Rajasthan student election: राजस्थान हाईकोर्ट के छात्रसंघ चुनाव को लेकर दिए गए फैसले के बाद छात्रों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने साफ कहा है कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक अधिकार हैं, लेकिन यह शिक्षा के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकते। इस फैसले के बाद छात्र राजनीति से जुड़े लोग खुलकर सामने आ रहे हैं और फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
नीरज खींचड़ का आरोप—छात्रों की आवाज दबाई जा रही है
KBPTimes से बात करते हुए छात्र नेता नीरज खींचड़ ने कहा कि वे हाईकोर्टके फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन छात्र हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता मंजूर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराना चाहते, क्योंकि चुनाव होने से भ्रष्टाचार और अनियमितताएं उजागर होंगी। नीरज का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव शिक्षा में बाधा नहीं हैं, बल्कि छात्रों की आवाज को दबाने का बहाना बनाया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: कमीशनखोरी मामला: विधानसभा समिति ने पूछताछ समाप्त की, रेवंतराम को मिले 15 दिन, ऋतु बनावत को 10 और अनीता को 7 दिन का अतिरिक्त समय
चुनाव नहीं हुए तो सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी
नीरज खींचड़ (Neeraj Khichar) ने कहा कि अगर गठित कमेटी ने छात्र हितों में फैसला नहीं लिया और छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए, तो वे इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जिस तरह पिछली सरकार को छात्रसंघ चुनाव रोकने का राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा, उसी तरह मौजूदा सरकार को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
यह भी देखें : छात्र संघ चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला | सरकार पर भड़के याचिकाकर्ता नीरज खीचड़



