CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक जून से री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है लेकिन अब छात्रों के सामने एक नई समस्या उभरकर सामने आई है वो है वेबसाइट का नहीं खुलना। इससे छात्रों की परेशानी बढ गई है। जैसा कि सभी जानते हैं कि CBSE कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद देशभर में ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे हैं. बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने अंकों पर आपत्ति जताते हुए उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मांगी है. बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि इस बार 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपियां देखने के लिए आवेदन किया है, जबकि कुल 11 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की मांग दर्ज की गई है. CBSE पोर्टल पर कॉपी वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू होनी थी. लेकिन जब छात्रों ने वेबसाइट खोली तो साइट पर मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है, जल्द पोर्टल उपलब्ध होगा का मैसेज दिखाई दिया।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे आवेदन
CBSE के अनुसार इस साल 4,04,319 छात्रों ने अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है. इन छात्रों ने कुल 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की. बोर्ड अब तक करीब 8.98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करा चुका है.यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक मानी जा रही है और इससे छात्रों की बढ़ती चिंताओं का अंदाजा लगाया जा सकता है.
बोर्ड सिस्टम पर उठे सवाल
इस वर्ष CBSE ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया.इस प्रणाली के तहत परीक्षक स्कैन की गई कॉपियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जांचते हैं.बोर्ड का कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है, लेकिन रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए.कई विद्यार्थियों ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं. वहीं कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी कॉपियों के कुछ उत्तरों की जांच नहीं की गई या फिर स्कैन की गई कॉपियों में तकनीकी खामियां थीं.सोशल मीडिया पर भी ऐसे कई स्क्रीनशॉट और शिकायतें वायरल हुईं, जिससे मामला और चर्चा में आ गया.
फीस में राहत देकर बोर्ड ने किया बड़ा बदलाव
छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद बोर्ड ने पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं की फीस में भी बदलाव किया है. अब छात्र 100 रुपये प्रति विषय देकर अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त कर सकते हैं. अंकों के सत्यापन के लिए भी 100 रुपये प्रति विषय शुल्क तय किया गया है.वहीं री-इवैल्यूएशन के लिए प्रति प्रश्न के आधार पर शुल्क लिया जाएगा.बोर्ड का कहना है कि शुल्क में कमी का उद्देश्य छात्रों को राहत देना और उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की सही तरीके से जांच करने का अवसर देना है.
कौन कर सकता है री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन?
जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे सबसे पहले अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका डाउनलोड कर सकते हैं. इसके बाद उत्तरों और अंक जोड़ने की प्रक्रिया को ध्यान से देख सकते हैं.यदि किसी प्रश्न की जांच नहीं हुई है या अंक देने में गलती दिखाई देती है, तो छात्र सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं.
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