AI technic and Job market: आज के तकनीकी दौर में कंपनियों को सही टैलेंट ढूंढने में AI समस्या भी बन रही है तो समाधान भी इसी से निकल रहा है- देश में जॉब मार्केट में नौकरियों की कमी नहीं है खूब वैकेंसी हैं लेकिन जॉब देने वालों को टैलेंटेड युवा नहीं मिल पा रहे है जिनकी उन्हे जरुरत है. यही कारण है कि युवा इंटरव्यू देकर भी खाली हाथ लौट रहे हैं.
कंपनियों के लिए सही उम्मीदवार ढूंढना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है. लिंकडिन की नई रिसर्च के मुताबिक, 2026 में 74 प्रतिशत रिक्रूटर्स को योग्य कैंडिडेट्स ढूंढने में दिक्कत हो रही है. दिलचस्प बात यह है कि नौकरियां तो हैं, लेकिन सही टैलेंट मिलना बड़ी चुनौती बन गया है.
AI से बने रिज्यूमे बन रहे बड़ी समस्या
रिक्रूटर्स का कहना है कि उन्हें पहले से ज्यादा जॉब एप्लीकेशंस मिल रही हैं, लेकिन उनमें से कई काम की नहीं होतीं. इसका एक बड़ा कारण AI से तैयार किए गए रिज्यूमे और एप्लीकेशंस हैं. आजकल कई लोग AI टूल्स की मदद से प्रोफेशनल और चमकदार रिज्यूमे बना लेते हैं, जो दिखने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन उनमें असली स्किल्स या अनुभव साफ नहीं झलकता. आधे से ज्यादा रिक्रूटर्स मानते हैं कि AI जनरेटेड एप्लीकेशंस की वजह से सही उम्मीदवार पहचानना और मुश्किल हो गया है.
स्किल्स की कमी भी बड़ी चुनौती
सिर्फ AI रिज्यूमे ही समस्या नहीं है. लगभग आधे रिक्रूटर्स का कहना है कि कंपनियों को जिन स्किल्स की जरूरत है, वैसे लोग बाजार में कम मिल रहे हैं. मतलब, एप्लीकेशंस तो हजारों आ रही हैं, लेकिन उनमें जरूरी स्किल्स वाले कैंडिडेट्स कम हैं. इससे भर्ती प्रक्रिया लंबी और थकाऊ हो जाती है.
हर नौकरी के लिए दोगुने से ज्यादा दावेदार
लिंकडिन के मुताबिक, 2022 के बाद से भारत में हर एक जॉब के लिए आवेदन करने वालों की संख्या दोगुने से ज्यादा हो गई है. कई प्रोफेशनल्स नौकरी बदलना चाहते हैं, लेकिन उनमें आत्मविश्वास की कमी भी दिख रही है. करीब 72 प्रतिशत लोग एक्टिवली नौकरी ढूंढ रहे हैं, जबकि 85 प्रतिशत का कहना है कि वे हायरिंग प्रोसेस के लिए खुद को तैयार नहीं मानते.
अब रिक्रूटर्स भी ले रहे हैं AI का सहारा
इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिक्रूटर्स खुद भी AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. भारत में जो रिक्रूटर्स पहले से एआई इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें से 71 प्रतिशत का कहना है कि इससे उन्हें ऐसे कैंडिडेट्स मिल रहे हैं, जिन्हें वे पहले मिस कर देते थे. करीब 80 प्रतिशत का मानना है कि एआई से यह समझना आसान हो जाता है कि उम्मीदवार असल में क्या कर सकता है. वहीं तीन-चौथाई रिक्रूटर्स का कहना है कि एआई की मदद से भर्ती प्रक्रिया तेज हो गई है.
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आने वाले समय में और बढ़ेगा AI का रोल
इस साल लगभग 80 प्रतिशत रिक्रूटर्स AI का इस्तेमाल और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं. वे इसे एप्लीकेशन स्क्रीनिंग, रिज्यूमे शॉर्टलिस्टिंग और टैलेंट खोजने जैसे कामों में इस्तेमाल करना चाहते हैं. कई लोगों का मानना है कि एआई आधारित शुरुआती इंटरव्यू से बेहतर बातचीत, जल्दी हायरिंग और उम्मीदवारों के बारे में साफ जानकारी मिल सकेगी.
अब जॉब टाइटल नहीं, स्किल्स हैं ज्यादा जरूरी
एक मल्टीनेशनल कंपनी की वाईस प्रेसिडेंट का कहना है कि अब भर्ती का फोकस जॉब टाइटल या बड़ी कंपनी के नाम से हटकर असली स्किल्स और काबिलियत पर जा रहा है. उनके मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर स्किल्स को पहचानना एआई के बिना मुश्किल है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर एआई भर्ती को ज्यादा फेयर और पारदर्शी बना सकता है.
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