New Delhi: भारत में भी अल्पसंख्यकों को अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है, कांग्रेस सांसद राशिद अल्वी के इस विवादित बयान से देश में एक नया सियासी तूफान खडा हो सकता है। बांग्लादेश में हिंसा को लेकर कांग्र्रेस सांसद के एक बयान से भाजपा को नया सियासी मुद्दा मिल सकता है। कांग्रेस सांसद (Rashid Alvi) ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बांग्लादेश सरकार जिम्मेदार है लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार के बयान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा और आरोप लगाया कि भारत में भी अल्पसंख्यक समुदायों को अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी के बयान से भारत में सियासी तूफान खड़ा हो सकता है।
क्या बोले कांग्रेस सांसद ?
कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह निश्चित रूप से निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए बांग्लादेश सरकार जिम्मेदार है। हालांकि, भारत सरकार के बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भारत में भी अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अत्याचार हो रहे हैं।
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कांग्रेस ने किया किनारा
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने राशिद अल्वी (Rashid Alvi) के बयान से किनारा कर लिया। इस संबंध में खुर्शीद से सवाल करने पर कहा कि अत्याचारों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। कहीं भी किसी के भी खिलाफ अत्याचार होता है, तो वह अस्वीकार्य है। हम लोकतंत्र के संविधान में विश्वास करते हैं; किसी के भी खिलाफ अत्याचार अस्वीकार्य है। वहीं, कांग्रेस नेता अलका लांबा ने जोर देते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे वह बांग्लादेश हो या फिर भारत। लांबा ने कहा कि बांग्लादेश में इस मामले में जो कुछ भी हुआ है, हमने उसकी आलोचना की है। (चाहे) बांग्लादेश हो या भारत, अल्पसंख्यकों की रक्षा करना कर्तव्य है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को बनाया जा रहा निशाना
रत में कांग्रेस नेताओं की ये टिप्पणियां ऐसे समय पर आई हैं जब बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। बांग्लादेश में एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है। वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। दो हिंदू नागरिकों की ढाका में हत्या कर दी गई है। इस बीच बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ टारगेटेड हिंसा की घटनाएं हो रही हैं।
इसी महीने की शुरुआत में ढाका से लगभग 100 किमी दूर मैमनसिंह में, 29 साल के गारमेंट फैक्ट्री वर्कर दीपू चंद्र दास को एक भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, पेड़ से बांध दिया और आग लगा दी। यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का एक बर्बर प्रदर्शन था। 18 दिसंबर की लिंचिंग के सिलसिले में कम से कम 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।



