Swarn Kanta Sharma (Justice) : दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल और अन्य लोगों की याचिका को खारिज करते हुए शराब नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उनकी याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि वो ही कथित शराब घोटाले केस की सुनवाई जारी रखेंगी.
केजरीवाल की प्रतिक्रिया
इस पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहली प्रतिक्रिया दी है. तमिलनाडु विधासनभा चुनाव के लिए द्रविण मुनेत्र कषगम के प्रचार में चेन्नई पहुंचे दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा- मैं कल यहां था. मैं वापस जाकर आदेश पढ़ूंगा. मैंने अपनी बात अदालत के समक्ष रख दी है. मैं उससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता हूं. इसके अलावा अरविंद केजरीवाल ने कहा, हम सभी परिसीमन विधेयक का विरोध करने में एकजुट हैं, क्योंकि यह लोकतंत्र पर हमला है और हम इसका कड़ा विरोध करते हैं. दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव होगा. मेरा मानना है कि एमके स्टालिन (सीएम तमिलनाडु) बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, और जो भी अच्छा काम कर रहा है, उसका समर्थन किया जाना चाहिए. बीजेपी को ज्यादा महत्व मत दीजिए. तमिलनाडु में बीजेपी की कोई मौजूदगी नहीं है.
आप नेता सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रतिक्रिया कहा कि हमने अपनी आशंका जताई थी लेकिन अगर वो सुनवाई करना चाहती हैं तो ठीक है. भारद्वाज ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के केस की सुनवाई जारी रखने के फैसले पर कहा कि ष्किसी भी जज से ये अपील की जाती है कि आप इस केस से अलग हो जाएं. इसमें आपको ये साबित नहीं करना होता कि जज पक्षपाती है. इसमें बस ये बताना होता है कि पार्टी के मन में आशंका है कि उसे न्याय नहीं मिलेगा.ष् उन्होंने कहा कि इस केस में अरविंद केजरीवाल ने अपने डर को लेकर दस प्वाइंट रखे कि मुझे इन वजहों से मेरे मन में मुझे संदेह हैं कि मुझे यहां न्याय नहीं मिलेगा. अब जस्टिस स्वर्णा कांता जी ने कहा कि नहीं, आपको यहीं न्याय मिलेगा.. मैं ही आपका केस सुनूंगी, मैं ही आपको न्याय दूंगी. लिहाजा अब वो ही इस मामले की सुनवाई करेंगी.
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फैसले पर बोलीं दिल्ली CM गुप्ता
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर CM रेखा गुप्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता. मुख्यमंत्री ने कहा, “केजरीवाल द्वारा न्यायिक प्रक्रिया पर लांछन लगाने और उच्च न्यायालय की एक मौजूदा न्यायाधीश की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का प्रयास न केवल अनुचित है बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी गंभीर रूप से ठेस पहुंचाता है.” उन्होंने एक बयान में कहा कि जब उच्च सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्ति इस तरह का आचरण करते हैं, तो इससे न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कम होने का खतरा होता है. भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के आरोपों से जुड़े आबकारी नीति मामले में केजरीवाल कई आरोपियों में से एक हैं.
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