Hydrogen Train : नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और भारत के नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय रेलवे अब हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. भारतीय रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन तैयार की है जिसे तय कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाएंगे. सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से खुद बिजली बनाकर चलेगी. इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होगा, बल्कि केवल पानी की भाप निकलेगी. जानकारी के अनुसार यह ट्रेन शुरुआत में हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी. इसकी परिचालन गति 75 किमी/घंटा और अधिकतम डिजाइन स्पीड 110 किमी/घंटा तय की गई है।
दुनिया की तुलना में भारत की ट्रेन क्यों खास?
दुनिया के कई देशों में चल रही हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 2 से 4 कोच की होती हैं. लेकिन भारतीय रेलवे की यह ट्रेन 10 कोच वाली होगी और इसमें करीब 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे. इससे भारत हाई-कैपेसिटी हाइड्रोजन रेल संचालन करने वाले देशों में शामिल हो जाएगा.
कैसे चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?
ट्रेन में लगे प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन मिलती है. इस रासायनिक प्रक्रिया से बिजली बनती है, जो ट्रेन के मोटर को चलाती है. इसके बाद केवल पानी की भाप और थोड़ी गर्मी निकलती है. यानी न धुआं, न डीजल और न ही सीधे कार्बन उत्सर्जन.
क्या हाइड्रोजन ट्रेन सुरक्षित है?
हाइड्रोजन ज्वलनशील गैस है, इसलिए रेलवे ने ट्रेन और रिफ्यूलिंग सिस्टम में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लगाई है.
मुख्य सुरक्षा इंतजाम
-हाइड्रोजन लीक का तुरंत पता लगाने वाले सेंसर
-हीट, धुआं और आग का पता लगाने वाले सिस्टम
-लगातार वेंटिलेशन ताकि गैस जमा न हो
-किसी भी खतरे पर ऑटोमैटिक हाइड्रोजन सप्लाई बंद करने की व्यवस्था
-लोको पायलट के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम और इमरजेंसी मोड
-रेलवे के मुताबिक पूरी परियोजना का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (जर्मनी) ने किया है और यह सुरक्षा मानकों के अनुरूप है.
जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन रेलवे इकोसिस्टम
ट्रेन को ईंधन देने के लिए हरियाणा के जींद में भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है. यहां पानी से इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन तैयार होगी.
500 बार प्रेशर पर स्टोर की जाएगी
-350 बार प्रेशर पर ट्रेन में भरी जाएगी
-एक साथ दोनों पावर कार में हाइड्रोजन भरने की सुविधा होगी
-इस प्लांट में करीब 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर की जा सकती है.
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक
इस ट्रेन का डिजाइन और इंटीग्रेशन भारत में ही किया गया है. तकनीकी मानक RDSO ने तैयार किए हैं, ट्रेन का इंटीग्रेशन मेधा सर्वाे ड्राइव्स ने किया है और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने इसकी बाहरी डिजाइन विकसित की है.
यह भी पढ़ें : रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की कार्रवाई, भारत पर लग सकता है 100% टैरिफ
यह भी देखें: जयपुर के शास्त्री नगर पेंटर कॉलोनी चौराहा बना कचरे का अड्डा, गंदगी, जाम और नशे से लोग परेशान



