Cruide Oil : अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने से ऑयल सप्लाई प्रभावित होने का डर है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से 2 सितंबर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूट गया। वहीं, निफ्टी 23,800 के नीचे फिसल गया।
सेंसेक्स-निफ्टी में कितनी गिरावट?
बीएसई सेंसेक्स बुधवार को 473 अंक यानी 0.6 फीसदी की गिरावट के साथ 76,471 पर खुला। शुरुआती कारोबार में बिकवाली और बढ़ गई। सेंसेक्स 809 अंक यानी 1.05 फीसदी गिरकर 76,135 के निचले स्तर तक आ गया। एनएसई निफ्टी 197 अंक यानी 0.8 फीसदी गिरकर 23,858 पर खुला। बाद में यह 269 अंक यानी 1.1 फीसदी की गिरावट के साथ 23,786 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
क्यों उछला कच्चा तेल?
अमेरिका और ईरान की ओर से रात में एक-दूसरे पर हमले किए। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 95.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऑयल क्रूड भी चढ़कर 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
होर्मुज से क्यों बढ़ी टेंशन?
बाजार के जानकारों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान टेंशन बढ़ने के साथ होर्मुज में आवाजाही पर असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है। देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। नतीजनत, तेल की ऊंची कीमतें माल ढुलाई और कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ा सकती हैं। कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालती हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है। वहीं, कंपनियां लागत खुद उठाती हैं, तो उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
सेंसेक्स में इंडिगो, एशियन पेंट्स, इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंफोसिस सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। जबकि में अदाणी पोर्ट्स, सन फार्मा और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल थे। इन शेयरों में अधिकतम बढ़त 0.61 फीसदी तक सीमित थी।
निफ्टी के लिए अगला टारगेट क्या?
निफ्टी 24,150 के नीचे कमजोर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि निफ्टी के 23,950 का स्तर तोड़ने पर गिरावट 23,800 तक बढ़ सकती है। बुधवार को निफ्टी 23,786 तक फिसलकर इस स्तर के नीचे जा चुका है। अब निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर अहम है। इस स्तर के आसपास टिकाव नहीं बनने पर बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। ऊपरी स्तर पर निफ्टी को बिकवाली के दबाव से निकलने के लिए 24,150 से 24,200 के ऊपर टिकना होगा। इस दायरे के ऊपर टिकाऊ बढ़त आने पर ही दबाव कम होने का संकेत मिलेगा। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी की दिशा कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में होने वाले इवेंट्स से तय होगी।
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