Petrol-Diesel : देश में तेल संकट के बीच पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी हो चुकी है. होर्मुज के बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई चरमरा गई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें आसमान पर है. इस वजह से तेल कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है. इसी की भरपाई के लिए तेल की कीमतों में वृद्धि की गई है. पहले फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया था कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती हैं। अभी रेट करीब पांच रुपये ही बढ़े हैं. इसलिए माना जा रहा है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम न हुआ और होर्मुज नहीं खुला तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होने से आशंका बनी रहेगी।
कंपनियों को आर्थिक नुकसान
एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि तेल विपणन कंपनियों को हो रहे भारी वित्तीय नुकसान को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करना बेहद अनिवार्य हो गया था. 27 मार्च 2026 को ही केंद्र सरकार ने ईंधन आयात पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की थी.
और बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट
जानकारी के मुताबिक, तेल कंपनियों के लगभग आधे घाटे की भरपाई करने के लिए कम से कम 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी जरूरी है. भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि सरकार की ओर से रिफाइनरी कंपनियों को इस घाटे से उबरने के लिए किसी भी तरह की वित्तीय सहायता या बेलआउट पैकेज देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. ऐसे में कंपनियों के पास जनता की जेब पर बोझ डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
कंपनियों के पास और कोई रास्ता नहीं
चूंकि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम मिलकर देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंपों को नियंत्रित करती हैं, इसलिए क्रूड का रेट नीचे न आने की स्थिति मे फिर से तेल के दाम बढ़ा सकती हैं. सरकारी तेल कंपनियों ने देशहित में अपनी जेब से नुकसान सहकर पूरे 11 हफ्तों तक कीमतें स्थिर रखी थीं, लेकिन जब घाटा बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो कीमतों को धीरे-धीरे बढ़ाना मजबूरी बन गया.
यह भी पढ़ें : 10 दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई की नई मार, दिल्ली में पेट्रोल ₹99 पार
यह भी देखें : b2 बाईपास श्रीराम कॉलोनी में बड़ा एक्शन, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले



