New Delhi: साल 2025 में भारत की ट्रेड पॉलिसी क्या रही, इस बात की चर्चा विदेशी नीति में ज़्यादा ध्यान शिखर बैठकों में रही है। पूरे साल भारत ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बाज़ार पहुंच बनाने, ग्लोबल सप्लाई चेन में भरोसेमंद भागीदार के रूप में खुद को पेश करने की कोशिश की।
2025 साल में यह साफ हुआ कि भारत अब व्यापार समझौतों को केवल आर्थिक मुद्दा नहीं मानता, बल्कि उन्हें विदेश नीति के अहम साधन के रूप में देखता है। कई बड़े समझौते अभी पूरे नहीं हुए हैं और देश के भीतर किसानों तथा छोटे उद्योगों की चिंताएं भी बनी हुई हैं। इसके बावजूद बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में भारत यह संदेश दे रहा है कि वह नियम तय करने की प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भूमिका चाहता है।
कांग्रेस व्यापार मंडल की सालाना बैठक में 28 नवंबर को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने बताया कि भारत अब लगभग 50 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या इसी तरह के समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इसमें अमेरिका, यूरोपीय संघ, खाड़ी सहयोग परिषद, यूराशियन ब्लॉक, आसियान, दक्षिण कोरिया, इज़राइल, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और मर्कोसुर जैसे देशों और समूह शामिल हैं।
भारत-ब्रिटेन के बीच बिजनेस समझौते की मुख्य बातें
24 जुलाई को भारत और यूके के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को आसान बनाने के कई कदम उठाए गए हैं।
भारतीय सामान पर यूके में 99 प्रतिशत वस्तुओं की आयात शुल्क समाप्त हो जाएगी। इसमें वस्त्र, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण शामिल हैं।
भारत की व्यापार कूटनीति को बड़ी कामयाबी
साल 2025 में भारत की व्यापार नीति को एक ठोस सफलता मिली है। यूरोपीय देशों के संगठन (यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन) के साथ हुआ ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट अब ज़मीन पर लागू हो गया है। स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन जैसे विकसित देशों वाले इस समूह के साथ यह भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।
मार्च 2024 में हस्ताक्षरित यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ। इसके तहत म्थ्ज्। देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश लाने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लिखित वादा किया है। किसी भी भारतीय व्यापार समझौते में यह पहली बार हुआ है जब निवेश और रोजगार को लेकर ऐसी बाध्यकारी प्रतिबद्धता दी गई है।
सरकार इसे एक “मॉडल” व्यापार समझौता बता रही है, जिसमें विकसित बाजारों तक पहुंच के साथ घरेलू उद्योगों को तैयारी का समय भी दिया गया है। अब असली परीक्षा आने वाले वर्षों में होगी, जब निवेश और रोजगार के वादों का असर दिखेगा।
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भारत और न्यूजीलैंड निर्यातकों के लिए मौके
इसी कड़ी में 22 दिसंबर को भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर ली। करीब नौ महीने चली बातचीत के बाद हुए इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर भारत में शुल्क कम या खत्म होगा, जबकि भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
इस समझौते में सेवाओं, निवेश और लोगों की आवाजाही से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं, जिनसे रोजगार बढ़ने और आर्थिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर निवेश का संकेत दिया है। दोनों देशों का मानना है कि अगले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो सकता है।
भारत-ओमान व्यापार से खाड़ी में मजबूत पकड़
18 दिसंबर को भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी ब्म्च्। हुआ। इस समझौते से 10 अरब डॉलर से अधिक के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ओमान ने भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों पर लगभग 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में शून्य शुल्क की सुविधा दी है। इसमें रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयां और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। वहीं भारत ने ओमान से होने वाले करीब 95 प्रतिशत आयात पर शुल्क में छूट देने पर सहमति जताई है, जबकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा दी गई है।
कतर के साथ बातचीत तेज
ओमान के अलावा भारत खाड़ी सहयोग परिषद के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। सितंबर में रियाद में हुई राजनीतिक वार्ता में 2024 से 2028 के संयुक्त कार्ययोजना की समीक्षा की गई और एफटीए वार्ता जल्द शुरू करने पर सहमति बनी।
कतर के साथ भारत का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना करना है। फिलहाल यह 14 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अक्टूबर 2025 में दोहा यात्रा के दौरान बताया कि समझौते का ढांचा तय हो चुका है और मध्य 2026 तक करार का लक्ष्य रखा गया है।
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में मुश्किलें
जहां एक ओर खाड़ी देशों के साथ प्रगति हुई, वहीं अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता आसान नहीं रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पारस्परिक शुल्क नीति के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर अगस्त के बाद से भारी शुल्क लगाया गया, जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
भारत और अमेरिका के बीच मार्च में व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी। नवंबर तक छह दौर की वार्ता हो चुकी है। दिसंबर में नई दिल्ली में हुई बैठक में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं, लेकिन समयसीमा तय करने से बच रहे हैं।
यूरोपीय संघ के साथ बातचीत
2025 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेत समझौते पर तेज बातचीत हुई। नवंबर और दिसंबर में यूरोपीय संघ का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आया।
हालांकि ऑटोमोबाइल और स्टील क्षेत्र में बाजार पहुंच, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म, नियमों की उत्पत्ति और सेवा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे अब भी अटके हुए हैं। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार है। 2024-25 में दोनों के बीच करीब 136.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ।



