LTCG : हर साल जब केंद्रीय बजट आता है, तो सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि शेयर बाजार में निवेश करने वाले करोड़ों लोग भी अलर्ट हो जाते हैं। निवेशकों की नजरें खासकर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स पर रहती हैं, क्योंकि इसका असर उनके मुनाफे और भविष्य की प्लानिंग पर सीधे पड़ता है। Budget 2026 से निवेशकों को इस मोर्चे पर बड़ी राहत की उम्मीद है।
LTCG टैक्स क्या है और कैसे काम करता है
जब कोई निवेशक शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या अन्य निवेश को लंबे समय तक रखने के बाद बेचता है और मुनाफा होता है, तो उस पर जो टैक्स लगता है, उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं। भारत में लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड को कम से कम 12 महीने रखने के बाद बेचने पर लाभ लॉन्ग टर्म माना जाता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, सालाना 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग टर्म मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है।
निवेशकों को क्यों है चिंता
LTCG टैक्स लंबी अवधि के निवेश की ताकत यानी कंपाउंडिंग पर असर डालता है। रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या भविष्य की जरूरतों के लिए सालों तक निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह टैक्स बोझ बन सकता है। महंगाई के असर को शामिल न करने की वजह से निवेश की बढ़ी हुई वैल्यू पर भी पूरा टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा, कंपनियां पहले ही टैक्स देती हैं और डिविडेंड पर भी टैक्स लगता है, जिससे निवेशकों को यह डबल या ट्रिपल टैक्स जैसा लगता है।
आशा और अगली दिशा
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि LTCG टैक्स की वजह से निवेशक अच्छे शेयर बेचने से बचते हैं, जिससे बाजार में लेन-देन कम हो सकता है। इसलिए सभी की निगाहें यूनियन बजट 2026 पर टिकी हैं। निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार LTCG टैक्स घटाए या नियमों को आसान बनाए। यह सिर्फ टैक्स का सवाल नहीं है, बल्कि उनके भविष्य की कमाई और वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला है।



