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क्यों नहीं गल पाई अमेरिका की ‘दाल’? भारत की Red Line ने बिगाड़ दिया ट्रंप का खेल

India-US Trade Deal: क्यों नहीं गल पाई अमेरिका की ‘दाल’?

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील (India-US Trade Deal) का ऐलान हो चुका है. इसका फ्रेमवर्क और फैक्टशीट भी सार्वजनिक कर दी गई है. लेकिन इस डील में एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है, जिसने अमेरिका की रणनीति को झटका दिया है. दरअसल, भारत ने कृषि उत्पादों (Agricultural Products), खासतौर पर दालों (Pulses) को इस समझौते से बाहर रखने में सफलता हासिल की है. व्हाइट हाउस द्वारा जारी संशोधित फैक्टशीट में अमेरिकी टैरिफ लिस्ट से भारतीय दालों का जिक्र हटा दिया गया है. यानी इस ट्रेड डील के तहत दालों को शामिल नहीं किया गया है. इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत और किसानों के हितों की सुरक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

ट्रेड डील की फैक्टशीट में हुआ बड़ा बदलाव

India-US Trade Deal की नई फैक्टशीट के अनुसार: अमेरिका द्वारा जारी प्रोडक्ट कैटेगरी लिस्ट से ‘Agriculture’ शब्द को हटा दिया गया है.
दालों (Pulses) को Tariff Cut सूची से बाहर कर दिया गया है.भारत द्वारा 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता को अब “Committed” की जगह “Intended/Planned” बताया गया है. यानी यह शर्त बाध्यकारी (Binding) नहीं रहेगी व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी में साफ तौर पर कृषि और दालों को डील के दायरे से बाहर रखा गया है.

भारत ने पहले ही खींच दी थी Red Line

भारत सरकार ने शुरुआत से ही कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया था. भारत ने अपने किसानों के हितों को देखते हुए इन क्षेत्रों को ट्रेड डील से बाहर रखने की Red Line खींच दी थी. दरअसल, अमेरिका लंबे समय से चाहता था कि उसके कृषि और डेयरी उत्पादों को भारतीय बाजार में टैरिफ फ्री एंट्री मिले. इसमें दालें, मक्का, गेहूं, दूध और पोल्ट्री जैसे उत्पाद शामिल थे. लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि वह अपने किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा. यही वजह रही कि India-US Trade Deal लंबे समय तक अटकी रही.

केंद्रीय कृषि मंत्री का सख्त संदेश

बीते साल जुलाई में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका के दबाव पर दो-टूक बयान दिया था:
“Nation First हमारा मूल मंत्र है. किसी भी दबाव में आकर किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा. बातचीत भारतीय किसानों को ध्यान में रखकर ही होगी.”
अब डील के ऐलान के बाद भी उन्होंने दोहराया कि: “इस समझौते से भारत के किसानों और उनकी खेती को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. कोई भी ऐसा उत्पाद शामिल नहीं किया गया है जो भारतीय कृषि को प्रभावित करे.”

पीयूष गोयल ने बताया कौन-कौन से उत्पाद बाहर

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी स्पष्ट किया कि ट्रेड डील में कई संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है.
डील से बाहर रखे गए उत्पादों में शामिल हैं: मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन.
उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है.

ट्रंप की रणनीति क्यों हुई फेल?

डोनाल्ड ट्रंप चाहते थे कि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में सीधी और सस्ती एंट्री मिले. लेकिन भारत की सख्त Red Line और किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की नीति के चलते अमेरिका को पीछे हटना पड़ा. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दालों और डेयरी उत्पादों को इस डील में शामिल किया जाता, तो इससे भारतीय किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता था और घरेलू बाजार पर विदेशी उत्पादों का दबाव बढ़ जाता.

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किसानों के लिए बड़ी राहत

India-US Trade Deal में दालों और कृषि उत्पादों को बाहर रखना किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. इससे घरेलू उत्पादन सुरक्षित रहेगा
MSP और बाजार कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा. छोटे किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से नुकसान नहीं होगा| भारत की खाद्य सुरक्षा बनी रहेगी

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