Gold Business : सोने के बढते भाव ने सबको हैरान कर रखा है वहीं Gold बाजार के जानकार का मानना है कि Gold की रिकॉर्ड कीमतें अब एक बड़ी चेतावनी की तरह देखी जा रही हैं. यह सवाल भी उठा है कि क्या दुनिया नई मंदी की दहलीज पर देखा गया है. Gold की कीमतें जब 5300 प्रति औंस के पार निकलते हीं इसे दुनियाभर के एनालिस्ट एक्सपर्ट के साथ-साथ ब्रोकेरज हाउस की रिपोर्ट में एक मजबूत रैली कहा गया, लेकिन ऐसा कहकर इसे टालना मुश्किल ही नज़र आता है. ये तेजी अब मुनाफे या ट्रेडिंग की कहानी नहीं रही. इसके पीछे डर है, अनिश्चितता है और ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम पर बढ़ता अविश्वास है. अमेरिकी डॉलर कमजोर हो रहा है, बॉन्ड्स पर भरोसा डगमगा रहा है और निवेशक तेजी से सेफ हैवन Gold की तरफ भाग रहे हैं.
डॉलर कमजोर हुआ है, जापानी येन में अचानक मजबूती आई है, ईरान को लेकर तनाव बढ़ा है और अमेरिकी जंगी जहाज खाड़ी की तरफ बढ़ते नजर आए हैं.
लंबे समय से ठंडा पड़ा कच्चा तेल भी अब ऊपर चढ़ने लगा है. ऐसे माहौल में निवेशकों का पहला रिएक्शन होता है रिस्क से दूरी और सेफ एसेट्स की तरफ भागना.
यही वजह है कि पहले से गर्म Gold और चांदी और ज्यादा गरमा गए. 28 जनवरी को स्पॉट Gold 5400 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक स्तर है.
चांदी की तेजी
चांदी ने भी इसी महीने में 50 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगा दी. ऊपर से देखने पर ये एक क्लासिक क्राइसिस ट्रेड लगता है, यानी संकट के वक्त होने वाली तेजी. लेकिन इस बार कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
आमतौर पर माना जाता है कि डॉलर कमजोर होता है, तो Gold खरीदा जाता है. लेकिन इस बार डर सिर्फ डॉलर की कमजोरी का नहीं है.
अंदर की कहानी फेड और अमेरिकी पॉलिटिक्स से जुड़ी है. शेयर बाजार इस साल दो से तीन रेट कट की उम्मीद कर रहा था, लेकिन फेड की तरफ से संकेत मिल रहे हैं कि केवल एक ही कटौती होगी.
इसके बावजूद Gold की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, जो साफ बताता है कि निवेशक ब्याज दरों से आगे की सोच रहे हैं.
नया चेयरमैन ट्रंप की पसंद का
निवेशक फेड में संभावित बड़े राजनीतिक बदलावों पर दांव लगा रहे हैं. चर्चा है कि आगे चलकर नया चेयरमैन आ सकता है, जो ट्रंप की पसंद का होगा.
अगर ऐसा होता है, तो ब्याज दरें डेटा के बजाय व्हाइट हाउस की सोच के हिसाब से तय हो सकती हैं. इसका मतलब है कि जरूरत से ज्यादा और आक्रामक रेट कट देखने को मिल सकते हैं.
अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिकी डॉलर की ग्लोबल साख को बड़ा झटका लग सकता है. अमेरिकी बॉन्ड्स पर भरोसा कमजोर होगा और यही वजह है कि सिर्फ रिटेल निवेशक ही नहीं,
बल्कि सेंट्रल बैंक और बड़े संस्थागत निवेशक भी अब हार्ड एसेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. गोल्ड और सिल्वर अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सिस्टम रिस्क से बचाव का हथियार बनते दिख रहे हैं.
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दूसरी बड़ी वजह जापानी येन की मजबूती है. लंबे समय से आशंका थी कि जापान में ब्याज दरें बढ़ेंगी. जैसे ही येन मजबूत हुआ, करीब एक ट्रिलियन डॉलर का कैरी ट्रेड वापस लौटने लगा.
रिस्की एसेट्स से पैसा गोल्ड सेफ एसेट्स में
इसका असर ये हुआ कि रिस्की एसेट्स से पैसा निकलकर गोल्ड जैसे सेफ एसेट्स में जाने लगा.
ऐसे में $5000 या उससे ऊपर का गोल्ड कोई टारगेट नहीं, बल्कि एक सिग्नल है. ये सिग्नल बता रहा है कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में गहरी दरारें उभर रही हैं.
सवाल ये नहीं है कि सोना महंगा हो गया या नहीं. सवाल ये है कि क्या दुनिया नई मंदी के मुहाने पर खड़ी है.
अब आने वाले 30 से 60 दिन बेहद अहम होंगे. यही तय करेंगे कि सोने की ये रिकॉर्ड तेजी यहीं थमेगी या फिर डर और अनिश्चितता के बीच एक नए और लंबे तेजी के दौर की शुरुआत होगी.
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