food : गर्मी के दिनों में आपको खाने की खुराक मात्रा का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, कम व हल्का भोजन आपको हेल्दी रख सकता है. मगर देखा यह जा रहा है कि थाली में परोसे जाने वाले भोजन की मात्रा बढ़ गई है. विशेषकर शादी या किन्ही दूसरे कार्यक्रमों में लोग अपनी खुराक से ज्यादा खा रहे हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि अगर प्लेट में दोगुनी मात्रा का भोजन परोसा जाए तो लोग अपनी भूख से 35 प्रतिशत ज़्यादा खाना खा लेते हैं. ज़ाहिर है कि इसका सीधा असर मोटापे की दर पर भी पड़ रहा है.
यह भोजन का अमेरिकीकरण
एक यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर के अनुसार जब खाना सस्ता हुआ तो बेचने वालों ने थोड़ी सी ज्यादा कीमत पर दोगुना भोजन देना शुरू कर दिया. खाना खरीदने वाले को भी इसमें फ़ायदा नज़र आने लगा. यह खाने के अमेरिकीकरण के चलते हो रहा है. जैसे-जैसे मैकडॉनल्ड्स या कुछ कैंडी बार जैसे अमेरिकी खाद्य उत्पाद दूसरे देशों में पहुंच रहे हैं, वहां भी भोजन की मात्रा बढ़ती जा रही है. ऐसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड खाने से शरीर में 500 कैलोरी ज़्यादा जा रही हैं.
थाली में परोसे भोजन की मात्रा से इतना फ़र्क क्यों
प्लेट में ज्यादा मात्रा में परोसे गए भोजन का ट्रेंड ब्राज़ील जैसे विकासशील देशों में भी देखा जा रहा है. ऐसा भी नहीं है कि बड़ी मात्रा वाली पूरी थाली लोग चट कर जाते हैं, देखा गया है कि अक्सर लोग थाली में खाना छोड़ देते हैं. लेकिन अधिक भोजन वाली थाली में खाना खाते समय लोग औसतन ज्यादा मात्रा खा लेते हैं.
छोटी प्लेट का इस्तेमाल क्या कारगर होगा?
पहले ऐसा माना जाता था कि भोजन को छोटी प्लेट में परोसने से इस समस्या का हल निकाला जा सकता है. तर्क था कि प्लेट में कम खाना आएगा और हमें देखने में प्लेट भरी हुई लगेगी. मगर वैज्ञानिक शोधों में यह सिद्धांत खरा नहीं उतरा. प्रोफ़ेसर लेनी वर्तनियन कहती हैं, सिर्फ़ प्लेट का आकार लोगों के खाने पर असर नहीं डालता. असली फ़र्क इस बात से पड़ता है कि अतिरिक्त भोजन उपलब्ध है या नहीं. इसका मतलब है कि अगर खाना पास रखी सर्विंग डिश में है तो लोग इसे दोबारा परोस लेंगे, फिर चाहे प्लेट का आकार कुछ भी हो. वह सलाह देती हैं कि ऐसे में लोगों को थाली में भोजन परोसने के बाद बाकी भोजन को वहां से हटा देना चाहिए ताकि आप उसे दोबारा न परोस सके.
अपनी भूख को समझना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे अहम बात है कि लोग अपनी भूख को समझते हुए खाने की प्लेट पर ध्यान दें. दरअसल रेस्तरां का खाना खाने, पैकेट वाले स्नैक्स खरीदने और बड़े बर्तनों में भोजन करने से समय के साथ हमारे दिमाग में सामान्य खाने की मात्रा की समझ बदल जाती है.
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